जमाने भर की गहमागहमी से गुजरती ज़िन्दगी ! अपने बोझिल सायों को ढ़ोते हुये , इक बेबसी मे मसरूफ

 

बन्दिशों के सख्त हालात , नामुरद दहशत हर सू पसरती हुयी !

चाँद , ईद का चाँद सामने ,
अभी धूँद्दलका हो रहा था , कुछ गाडियों की हेड लाईट जल गयी थी !
सामने दूर आसमान मे एक प्रतीबिंब सा उभरा , मैने समय को तलाशा ,7.36 !
गाडी चलाते हुये फिर सामने सड़क पर आँखें टिक गयी !
ध्यान आया के ये जरनैली सड़क है , पश्चिम की ओर बढ़ रहे थे हम !
अब ये हाईवे मे तबदील हो चुकी है ! फोर लेन !
ह्ल्का सा घुमाव सड़क का एक गांव को अब कुछ दूर कर रहा था !
लेकिन गांव के क्षितिज पे फिर एक ह्ल्की सी रोशनी आँखों के सामने उभार गयी ! मानो कह रही हो के जी भर के निहार लो !
जाने कितनी ही दुनियां की खुशियां , सूकूँ और यकीं समेटे हुये !

थोड़ा धीरे करके देखा तो वाकयई बेहद खूबसूरत !
अनाय़ास ही एक मुस्कुराहट का अहसास हुआ !
तब से सोच रहा हूँ
एक यकीन कितना गहरा , कितना शदीद !
क्या ताल्लुक , किस से ऐसा ताल्लुक , कियूँ ये तस्वर !

यादों के पुराने सफों से इक अक्स पुकारता

‘ अली ईमाम ए मानास्तो मनम गुलाम ए अली
हजार जान ए गिरामिए फिदा ए नाम ए अली ‘

मन कुंतो मौला
मन कुंतो मौला !

जगदीप सिंह सिंधु , वरिष्ठ पत्रकार , राजनितिक विश्लेशक .

 

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