Petrol Diesel Rate: कम डिमांड में गिरावट से बेहाल कच्चे तेल के दाम उछाल मार सकते हैं। अगर ऐसा हुआ तो ग्राहकों पर फिर से महंगाई की मार पड़ सकती है।

अनलॉक-1 के दूसरे फेज की शुरुआत के साथ ही ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 83 दिन से जारी ब्रेक को हटा दिया। बुधवार को लगातार चौथे दिन पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाए गए। इस बढ़ोतरी की एक बड़ी वजह पेट्रोल-डीजल पर लगने वाला टैक्स भी है। दरअसल, फरवरी में पेट्रोल-डीजल पर करीब 107 फीसदी टैक्स लगता था। बीते 3 महीनों में ये टैक्स करीब ढाई गुना बढ़कर करीब 275 फीसदी हो गया है। जिस तरह से सरकार के ऊपर कोरोना काल में राहत पैकेज से लेकर तमाम तरह की रियायतें देने का दबाव है, उसकी भरपाई के लिए पेट्रोल-डीजल पर टैक्स लगाना ही सबसे आसान रास्ता है।

वैसे तो बीते कई महीनों से कच्चे तेल के दाम न्यूनतम स्तर पर रहे हैं और सरकार को मौजूदा कीमतों पर इससे बड़ी कमाई होनी चाहिए थी। लेकिन लॉकडाउन के चलते जब पेट्रोल-डीजल की बिक्री ही आधी से ज्यादा लुढ़क गई तो सरकार के हाथ से ये मौका फिसल गया। अप्रैल में तो पूरी तरह और मई में करीब करीब लॉकडाउन का ही असर रहा। ऐसे में रिटेल बिक्री तो कहीं कहीं पर महज 10 फीसदी ही रह गई। सरकार ने कच्चे तेल के दाम घटने से पेट्रोल-डीजल को सस्ता करने की जगह उस पर एक्साइज बढ़ाकर अपनी खाली होती तिजोरी भरने की कोशिश की।

बिना टैक्स पेट्रोल डीजल की कीमत (Petrol Diesel Rate without Tax)

वैसे इस टैक्स को हटाने पर तो देश में पेट्रोल महज 18 रुपए प्रति लीटर पर मिल सकता है। फिलहाल इस पर करीब 50 रुपए के टैक्स लगते हैं और पेट्रोल पंप डीलर्स का मार्जिन-ढुलाई वगैरह मिलाकर ये 72 रुपए प्रति लीटर पर मिल रहा है। केंद्र सरकार पेट्रोल पर करीब 33 रुपए प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी वसूल रही है जबकि वैट के तौर पर 16 रुपए प्रति लीटर राज्य सरकारों की झोली में जाते हैं। हालांकि फ्यूल पर टैक्स लगाकर खजाना भरने का काम केवल भारत सरकार नहीं करती है। दुनिया की तमाम दिग्गज अर्थव्यवस्थाएं इसे अपनी आमदनी के बड़े ज़रिए के तौर पर इस्तेमाल करती हैं। तेल के बड़े उत्पादक देश अमेरिका में तो पेट्रोल पर केवल 19 फीसदी टैक्स वसूला जाता है लेकिन जापान में इस पर 47 फीसदी ब्रिटेन में 62 फीसदी और फ्रांस में 63 फीसदी तक टैक्स वसूला जाता है।

पेट्रोल डीजल पर आगे क्या होगा (Petrol Diesel Rate)

भारत में अब सरकार तो इस पर ज्यादा टैक्स लगाने से परहेज करेगी लेकिन इसके अलावा तमाम देशों में धीरे-धीरे लॉकडाउन हटने से पेट्रोल-डीजल की डिमांड बढ़ सकती है। ऐसे में कम डिमांड में गिरावट से बेहाल कच्चे तेल के दाम उछाल मार सकते हैं। अगर ऐसा हुआ तो ग्राहकों पर फिर से महंगाई की मार पड़ सकती है। पहले ही तेल उत्पादक देशों ने गिरावट से घबराकर कच्चे तेल के उत्पादन में कटौती की है। अब अगर हालात नहीं सुधरे तो तेल उत्पादक देश ज्यादा कटौती करने का फैसला कर सकते हैं। इससे भी दाम बढ़ने की आशंका तेज हो सकती है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here