अखिलेश यादव अब सीएम योगी से नहीं बल्कि पीएम मोदी से लेंगे टक्कर, कन्नौज से किया बड़ा ऐलान

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Chhattisgarh.Co 24 November 2022 कन्नौज: साल 2024 का लोकसभा चुनाव अभी दूर है, लेकिन सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इसकी तैयारी आज से ही शुरू कर दी है। कन्नौज पहुंचे अखिलेश यादव ने ऐलान किया कि वह 2024 का चुनाव लड़ेंगे वह भी कन्नोज से। इससे साफ हो गया है कि अखिलेश यादव आगामी चुनाव में पीएम मोदी को टक्कर देने वाले हैं। दरअसल कन्नौज से डिंपल यादव की हार अखिलेश यादव अब तक भूल नहीं पाए हैं। ऐसे में पत्नी को सुरक्षित मानी जाने वाली मैनपुरी सीट से चुनावी मैदान में उतार दिया है और अब कन्नौज में खुद बीजेपी से भिड़ने के लिए तैयार हैं।

अखिलेश कन्नौज से लड़ेंगे लोकसभा चुनाव

दरअसल कन्नौज पहुंचे अखिलेश यादव से जब पूछा गया कि उन्होंने डिंपल यादव को कन्नौज से मैनपुरी क्यों शिफ्ट कर दिया तो उन्होंने कहा कि अब वह खुद कन्नौज से चुनाव लड़ेंगे। अभी तक इस बात की चर्चा थी कि अखिलेश यादव ने विधानसभा का चुनाव इसलिए लड़ा, ताकि वे उत्तर प्रदेश में सदन के भीतर बीजेपी सरकार और खासकर सीएम योगी के सामने विपक्ष का चेहरा बनकर मौजूद रहें, ताकि सरकार को घेरा जा सके, लेकिन आज जिस तरह से उन्होंने ऐलान किया कि वह 2024 का चुनाव लड़ेंगे और वह भी कन्नौज से तो साफ हो गया कि वह राष्ट्रीय राजनीति को ज्यादा महत्व दे रहे हैं।

 

आजमगढ़ से चुनाव लड़ सकते हैं शिवपाल यादव 

सूत्रों के मुताबिक चर्चा है कि अखिलेश यादव आजमगढ़ से शिवपाल यादव को 2024 के लिए टिकट दे सकते हैं। बता दें, अखिलेश यादव के पिता मुलायम सिंह यादव भी कन्नौज से चुनाव लड़ चुके हैं। सपा को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के इरादे से मुलायम सिंह ने केंद्र की राजनीति का रुख किया। साल 1996 में मुलायम सिंह यादव 11वीं लोकसभा के लिए मैनपुरी सीट से चुने गए। उस समय केंद्र में संयुक्त मोर्चा की सरकार बनी तो उसमें मुलायम भी शामिल थे।

कन्नौज सीट जीत चुके थे मुलायम सिंह

मुलायम सिंह देश के रक्षामंत्री बने थे। लेकिन यह सरकार बहुत लंबे समय तक नहीं चल पाई। मुलायम सिंह यादव को प्रधानमंत्री बनाने की बात चली थी। तब वह पीएम बनने की दौड़ में सबसे आगे खड़े थे, लेकिन लालू प्रसाद यादव और शरद यादव ने उनके इस इरादे पर पानी फेर दिया। इसके बाद चुनाव हुए तो मुलायम सिंह संभल से लोकसभा में वापस लौटे। उन्होंने कन्नौज सीट पर भी जीत दर्ज की थी, लेकिन वहां से उन्होंने अपने बेटे अखिलश यादव को सांसद बनाया।

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