मुखिया के मुखारी -कोई ना कोई चाहिए काम करने वाला….

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कोई ना कोई चाहिए काम करने वाला  – सरकारें बनती है नित नए काम कर विकास की धारा बहाने के लिए, अब ये  विकास की धारा बहायेगा कौन ?  क्योंकि इसके लिए तो कामों का होना अति आवश्यक है |अब काम करे तो करे कौन ,यहां तो पूर्व मुखिया और मुखिया आज  बता रहे हैं कि इन्होंने तो बस क़र्ज़ ही लिया है, चलो मतलब ये की दोनों सरकारों ने खूब कर्जा लेकर घी पिया है| अब माननीयों के बातों का मान न रखे ऐसा कैसे हो सकता है, जो काम हुए हैं कर्जो से ही हुए हैं| फिर कर्ज माफी भी दोनों ने की हुई है ,सो अपने लिए भी शायद कर्ज माफी की आस होगी ,वैसे भी सरकार किसी की हो ,क़र्ज़ और कर्जमाफी ,मुफ्त की योजनाएं खुद सरकारी दावों की पोल खोलती है |सात दशको में विकास देश में इतना हुआ है कि मुफ्त की बिजली , पानी से लेकर मुफ्त की राशन की योजनाएं सरकारों को चलानी पड़ रही है | देश में विकास खूब हुआ ,जीवन स्तर में इतना सुधार हुआ कि लोगों का जीवन  बिना मुफ्त की योजनाओं के चल ही नहीं पा रहा| मतलब मुफ्त की योजनाएं विकास का पर्याय है | जितने विकसित होंगे उतनी मुफ्त की योजनाएं कमाल की  है, सरकारी दावों कामो का परिणाम| किसानों की सरकार पर आरोप लग गया कि ब्याज देने के पैसे नहीं, राजस्व व्यय , पीएम आवास, राशन वितरण में  कुप्रबंध  की वजह सरकार द्वारा लिया गया कर्ज है|

इसी आरोप में  एक स्वीकारोक्ति भी है-  विकास के लिए सभी सरकारे कर्ज लेती है ,मतलब सरकारे काम कर्जो पर करती है ,उससे ही विकास करती है| सरकारे फिर कर्जमाफी कैसे करती है |खुद कर्ज लेकर विकास कर रही है , कर्ज माफी पे कर्ज माफी कर रही |काम कर रही भ्रमित होने के लिए बस क़र्ज़  ही काफी है | सरकारी विकास, कर्ज और कर्ज माफी समझ आ जाए इतना भी आसान नहीं वैसे भी जनता को समझ में आ जाए वो  कैसी राजनीति।

विशेष संरक्षित जनजाति पंडो की मौत सुंदूर उत्तर छत्तीसगढ़ के सरगुजा अंचल में हुई |  सरकार कह रही है कि बीमारी से मौत हुई है |स्वास्थ्य मंत्री ने जांच के आदेश दे दिए |विपक्ष कह रहा है की मौत कुपोषण  से हुई है | जिसकी स्वीकारोक्ति जनसंपर्क विभाग द्वारा की गई है| ऐसा विपक्ष का कहना है मतलब स्वास्थ्य में भी काम कैसा हो रहा है ?डेंगू के लिए आरोपों के ढेर स्वास्थ्य विभाग पर ही लग रहे है |राजनीतिज्ञ स्वास्थ्य विभाग का ध्यान कुछ ज्यादा ही रख रहे ,रखना भी चाहिए |स्वास्थ्य खराब होना किसी का भी अच्छा नहीं है, वो चाहे जनता का हो ,नेता का,  या फिर सरकार का| किसका स्वास्थ्य कब कैसे सुधरेगा ये तो स्वास्थ्य विभाग वाले को भी नहीं पता| वो भी तीर कमान में चढ़ाए सबकी ,अपनी स्वास्थ्य की मंगल कामना कर रहे हैं|

अब पता नहीं क्यों उनके अपने ही उनके विभाग स्वास्थ्य के पीछे लगे हैं| पाटे टूट रहे हैं ,राजधानी में |देर नहीं होगी पाए अवैध कब्जे को ढेर बना देंगे | ये  दावे  हैं निगम के पानी की निकासी का तुरंत -फुरंत हो जायेगी |मतलब राजधानी राजधानी ही रहेगी पानी पानी नहीं होगी,  वैसे ये  पाटे अवैध कब्जे एक दिन में तो हुए नहीं होंगे| नाली  रास्ते एक ही दिन में बंद तो हुए नहीं होंगे , पर न नगरी निकाय पर कोई आरोप है न पूर्ववर्ती महापौरो पर |गजब का संयोग है डेंगू के लिए स्वास्थ्य विभाग जिम्मेदार पर इन सब के लिए कोई नहीं जिम्मेदार |अपनों अपनों में ही नहीं रहा अपनापन कुछ अपने तो कोई हो गया है पूरा बेगाना|

राजनीति है जरूरत और स्वार्थ  की तो बस वैसे ही है ,कहते तो है राजनीति संभावनाओं से भरी है,जिसमे  कोई किसी का स्थाई दुश्मन और दोस्त नहीं होता |कुछ का तो अनुभव भी वैसा ही है हाउस आना जाना तब भी निर्बाध था आज भी वैसा ही |अब ये  अपनी-अपनी प्रतिभा है दुश्मन का दुश्मन  दोस्त ,की जगह अब दुश्मन का दोस्त भी दोस्त, का राजनीतिक चलन  है |सरकार काम कर रही है ,विकास कर रही ,फिर भी क़र्ज़ ले  रही स्वास्थ्य विभाग काम कर रहा डेंगू , पंडो की मौत हो रही |  स्वच्छ रायपुर पानी से लबालब हो रहा, प्रदेश की राजनीति को देखकर लग रहा, सरकार तो विकास कर रही पर पूरा छत्तीसगढ़ कह रहा – कोई ना कोई चाहिए काम करने वाला|

चोखेलाल
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मुखिया के मुखारी में व्यवस्था पर चोट करती चोखेलाल

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