मुखिया के मुखारी – दादी ओ दादी – नो कमेंश…

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chhattisgarh.co 25 september 2021 : आपके कमेंट्स पर नो कमेंश – दादी के नुस्खों से प्रेरित दादी ने अपने नुस्खे दिए और ये भी बता दिया कि झोलाछाप डॉक्टर को ज्यादा सोचना नहीं चाहिए कि उनका राजनीतिक नक्षत्र पुनः चमकेगा, टिकट के लाले अपने लिए ही नहीं लाल के लिए भी पड़े हैं। अब ये सुनके डॉक्टर साहब ने अपने राजनीतिक सफलता के लिए नया क्या करेंगे ?क्या पुरानी गलतियों का पुनरावलोकन करेंगे? । डॉक्टर साहब ने तो चाउर वाला बाबा की उपाधि के साथ-साथ पन्द्रह साल की मुखियाई भी कर ली । पहले निर्वाचित मुख्यमंत्री से हुई शुरुआत पन्द्रह सालों के बाद थमी ।इस कहानी का पटाक्षेप करवाने वाले कई थे, कुछ मंत्री, कुछ सलाहकार ,कुछ अधिकारी ।सबने मिलकर ऐसी सरकार की छवि गढ़ी की पन्द्रह साल की सरकार को पन्द्रह विधायकों का संख्या बल नहीं मिला । अब ऐसे ही चाल कांग्रेस में चल रही है ।

माननीयों की रस्साकशी में विधायक मंत्री कमेंट्स कर रहे ये अलग बात है कि वों नो कमेंश कहने के लिए मशहूर रहे हैं । स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी मरीजों को कोई सिम्स में ही घूमाते हैं ऐसा नहीं है ये इनकी रोज की करस्तानी है । अब शासन को ये ज्ञात नहीं ऐसा तो हो नहीं सकता । स्वास्थ्य विभाग वैसे भी स्वास्थ्य के प्रति सजग कम अधिकारों के लिए ज्यादा है। अस्वस्थ स्वस्थ हो या ना हो इलाज मांगा तो परिवार सहित बेईज्जत होने के आसार ज्यादा है स्वास्थ्य कार्डों के हाल बेहाल हैं। पीट गए तो हाहाकार मचा रहे अब पीटने के कारण कि किसे है जानकारी या इससे इनका क्या वास्ता, अजब है न्याय की प्रक्रिया बीमार के प्रति संवेदना नही पर अपने अधिकारों के लिए पूरी सजगता ।पार्टी पदाधिकारी कर्मचारी को पीट रहे। स्वास्थ्य और गृह विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल है पर इसका जवाब कोई नहीं देगा क्योंकि अपना दोष कब कहां किसी को दिखता है ।

सरकार के मंत्री हैं, जब बोलना है अपनों के लिए तो नो कमेंश बाकि दुसरे की हो तो सीधे झोलाछाप, अब ये राजनीति के कौन से स्तर का परिचायक है। ये कमेंट्स है इस पर हमारा भी नो कमेंश। दादी ओ दादी आयुर्वेदिक कॉलेज में पढ़ा झोलाछाप डॉक्टर है तो वों आपके केबिनेट के सहयोगियों के लिए भी क्या आपके यही विचार है ,यदि शैक्षणिक योग्यता की बात है तो फिर दादी आपका क्या हाल है ।पद गोपनीयता की शपथ कैसे पूरी हो रही होगी ये भी एक सवाल है, बिना पढ़े फाइल पढ़ने का आपका अपना अंदाज है। लोकतंत्र की पांच साल वाली अस्थाई पट्टे की सत्ता है फिर भी आप तो दूसरों को टिकट के लिए तरसते बता रहे,क्योकि आप और आपके लाल दोनों अभी सत्ता का सुख पा रहे।

तमाम सीमाओं के बाद भी आपकी उपलब्धि अपार है ।दादी ओ दादी – दादी तो गंभीरता की मानक है पर आप तो दादी हो सास की भूमिका निभाने बेताब है । सत्ता समीकरण बदल रहे आप भी अपना महत्व समझ रहे, मीडिया सलाहकार – वाले पहले मंत्री आप हो गए सफलता के पथ पर बढ़ने के तरीके आप भी सीख रहे । वैसे जिन वादों के साथ सरकार आई आप उसे क्यों पूरा होने नहीं दे रहे । शराब और उद्योग दोनों आपके पास हैं । छत्तीसगढ़ में शराब सरकारी उद्योग हैं दुकान, कर्मचारी, शराब, सब सरकारी । फिर शराब बंदी वाले वादे का क्या है दादी ? करिए नए जतन उपमुख्यमंत्रियों की खोज जारी है क्या पता कब किस का भाग्य चमक जाए । बोल है बोल कर देखिए शायद बोल के ही कुछ अनमोल मिल जाए । दादी ओ दादी – नो कमेंश…

चोखेलाल
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मुखिया के मुखारी में व्यवस्था पर चोट करती चोखेलाल

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