मुखिया के मुखारी – छत्तीसगढ़ियो को विपक्ष से भी नहीं है कोई आसरा….

 

 

छत्तीसगढ़ की राजनीति में विपक्ष को जन मुद्दों की पहचान ही नहीं रह गई है, या फिर मेहनत कौन करें अभी से, अभी तो चुनावी वर्ष आने में वर्षों हैं, की तर्ज पर काम कर रही है। दो दलीय चुनावी संघर्ष को त्रियद्लीय करने की चाहत लिए प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री क्या विदा हुए, उनके दल के वजूद के विदा होने की आशंकाए उत्पन्न हो गई है। यदा-कदा चर्चा उनके विधायकों की होती भी है तो दल – बदल को लेकर जन मुद्दों के लिए नहीं। सत्तारूढ़  हुए प्रदेश की सरकार को ढाई वर्ष बीत गए, ढाई की लड़ाई की आस में घोड़ी की चढ़ाई न कर पाने वाले भी सत्ता शिखर की चढ़ाई के सपने बुने रहे हैं, सपने परवान चढ़ेगे की उम्मीद पे अपने बयानों से संघर्षशील होने का प्रमाण दे रहे हैं।

ढाई की चाल में राजनीतिक संभावनाएं देख रहे लोगों को शायद अभी और ढाई साल का इंतजार करना होगा. पर ये तो मानना होगा कि मुखिया ने ढाई साल में अपनो और विपक्षियों दोनों को उलझा रखा है । ढाई साल में ढाई मुद्दे भी नहीं ढूंढ पाने वाली विपक्ष जैसे खुद स्वीकार रही है कि सरकार से जनता को अभी भी ढाई अक्षर वाला प्यार है। नरवा, गरवा, घुरवा, अउ बारी न्याय योजना ,गोबर खरीदी छत्तीसगढ़ी अस्मिता कि कोई कांट अभी तक विपक्ष नहीं ढूंढ पाई है । कुंद हो गई है धार विपक्ष की क्योंकि छत्तीसगढ़ की धरा पर धरा के ईश विराजमान है।

पंद्रह साल की सत्ता की विलासिता, पत्तों में छुपी जनता के हाल को जानने कैसे दें हलाकान है ,अपने हाल पे ,सत्तागवा के सोचने का माद्दा भी गवा दिए है। नरम मुलायम सत्ता के गद्दों की आदत है। राजनीति के गड्ढों पर चाल कैसे साध पाएंगे ? संप्रभुता की सत्ता से छोटी ही है. विपक्ष की ताकत से सत्ता और विपक्ष को दोनों को अपनी ताकत का एहसास है, और दोनों को और कईयों को भी ढाई साल वाला इंतजार है।जनता रोज कमाने खाने को लाचार है पंचवर्षीय कमिया {नौकर} बताते रोज एक दूसरे की खामियां,फिर डालते गलबईहा ,गलतियां करते रोज नए-नए कारनामे फिर भी ये एक दूसरे को आगे बढ़ाते कमी ना धन वैभव मे है ना इनके कमाईयो मे रोज छत्तीसगढ़ीयों की जिंदगियों में कमियां हो रही है, कल तक के भ्रष्टाचार के आरोपी आज सत्ता की मलाई मिल बांटकर खा रहे हैं ,बटाई में ये है बराबर के भाई जिन मुद्दों पर जनता परेशान है, उन मुद्दों पर इन माननीयों का ना कोई संज्ञान है।

नशा मुक्ति का अभियान है पर सरकार का शराब बेचने का रोज नया प्लान है. सरकार तो सरकार है पर क्या इसके लिए विपक्ष नहीं जिम्मेदार है? जो वादे सरकार ने नहीं निभाये उन वादों पर क्यों आपने जवाब नहीं मांगा? पूर्ण शराबबंदी नहीं हुई क्या आप इसके जिम्मेदार नहीं है? दर-दर भटक रहे किसान आज खाद के लिए ,अमानक बीजों का हो रहा भंडारण है, बीजो और कृषि उत्पादों के साथ हताशा बांटी जा रही है । प्रदेश के किसानो ने आत्महत्या की फिर भी आपकी आत्मा नहीं जागी अनाचार – दुराचार संरक्षित आदिवासी लाचार कानून व्यवस्था की रोज उड़ती धज्जियां है, गुम है सारे मापदंड शासन-प्रशासन के फिर भी आप अपनी मौनी राजनीति में मशरूफ है।

रेत की कीमतें बढ़ी या स्वास्थ्य सुविधाओं का हो आभाव ना आपकी भाव, भंगिमाए बदलती है ना एक दुसरे के लिए भाव सब भाव आपके ही हैं, जनता का कहां कोई भाव ,आप माननीय तब भी थे अब भी हैं।मान का ही मान है जनता का कहा मान, जो जनहित के मुद्दों का आप करे सम्मान,
ढाई साल में ढाई दिनों का ना कोई जन आंदोलन, ना कोई मुद्दे ढुंढ पाए लकवा ग्रस्त हाथों से तलवार कैसे भाजेंगे ऐसे कैसे आप छत्तीसगढ़ीयों का हित साधेंगे ?इस मौन की भी कोई कीमत ली होगी आपने ,सो जनता की सुध क्यों लेंगे ,सुधि है एक दूसरे के सुध को साध रहे ।

चुनावी वर्ष में बेमानी के आरोप एक दूसरे पर बरसा देंगे , जनता को दाने-दाने के लिए तरसा देंगे, संकट तो आम जनता के जमीन जीवन पर है. आप तो जन-जन के संकटमोचक है सो आप पर संकट कहां पक्ष -विपक्ष की अदला – बदली है पर कब आपकी जिंदगी बदली है. लक्ष्मी नाचती आपके द्वार सत्ता बैठी आपके चौखट के पास खट रही जनता है आपको बस अपने चौखट की चिंता है सत्ता के दायित्वों की कमी ने विपक्षी बना दिया ,जन पक्ष की मोह भंगता से आप क्या सत्ता पा जाएंगे.दायित्व विपक्ष का भी आपसे नीभ नहीं रहा नियत ही नहीं है पुरुषार्थ से जीतने की सरकार की गलतियों से चुनाव में जीत का आसरा है पर इतना जरूर समझ लीजिएगा ऐसे में छत्तीसगढ़ियो को विपक्ष से भी नहीं है कोई आसरा

चोखेलाल
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मुखिया के मुखारी में व्यवस्था पर चोट करती चोखेलाल

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