बालोद : जिला मुख्यालय से लगभग 12 किलोमीटर दूर करहीभदर के सद्गुरु कबीर आश्रम करहीभदर के ही संत दिनेंद्र दास की दो पुस्तके खजाने की चाबी 101 लघुकथाएं एवं सुखमय जीवन की प्रेरक कहानी की समीक्षा एवं भव्य कवि सम्मेलन संपन्न हुआ।
सदगुरु कबीर साहेब की पूजा एवं आरती के साथ कार्यक्रम प्रारंभ हुआ।स्वागत गान श्रीमती सीमा साहू एवं नोमीन साहू के मधुर कंठ से युगल ध्वनि हुई । तत्पश्चात शारदा विद्या पीठ करहीभदर के प्रधानाचार्य जागृति साहू के छात्राओं ने स्वागत गीत प्रस्तुत की।
इस अवसर के मुख्य अतिथि बलदाऊ साहू दुर्ग,प्रदेश अध्यक्ष हिंदी साहित्य भारतीय छत्तीसगढ़ ने अपने उद्बोधन में कहा, दिनेंद्र साहेब के अंतःकरण में समाज के बुराइयों के प्रति पीड़ा है उस पीड़ा को इंगित करते हुए सुधार की बात कही है।
डॉ. अशोक आकाश बालोद, अध्यक्ष मधुर साहित्य परिषद ने पुस्तकों की समीक्षा करते हुए कहा, उनके साहित्य में संदेशों को रचनात्मक रसात्मक अभिव्यक्ति और जीवन दर्शन का काव्यात्मक रंग देखने को मिलता है पुस्तक के माध्यम से समाज के प्रत्येक वर्ग के लिए पथ प्रदर्शक का कार्य कर रहे हैं और आगे भी करते रहेंगे।
जगदीश देशमुख ने कहा, दिनेंद्र साहेब विभिन्न जगहों में भ्रमणशील करने वाले संत हैं जहां देखते हैं वहां की बातें उनके हृदय पटल पर प्रतिबिंबित होते रहता है और वह लेखनी में सामने आती है। टी.आर.महमल्ला गुरुर ने अपने उद्बोधन में कहा, दिनेंद्र जी की अधिकांश कहानी अत्यंत मार्मिक दृश्य प्रस्तुत करती है जैसे कि अपना- पराया, असली जगदंबा, चुनाव ,देना सीखे आदि।
पुस्तक लेखक दिनेंद्र दास ने कहा कहानी लिखने का उद्देश्य इतना ही है कि समाज में फैले हुए कुरीतियां,अंधविश्वास पाखंड, ब्रह्म ,भूत प्रेत, चमत्कार से ऊपर उठकर नई जागृति पैदा करना ,विवेकवान बनना और सद्दाचरण अपनाना।
संत देवेंद्र साहेब कबीर आश्रम करहीभदर ने अपने उद्बोधन में कहा, संत दिनेंद्र साहेब की पुस्तकें कबीर के विचारों से ओतप्रोत हैं। कोई ढकोसला, छुआछूत अंधविश्वास, पाखंड ,जादू टोना ,भूत- प्रेत ,दुआ- ताबीज का भ्रम नहीं ।उनकी कहानी जनमानस में जागृति पैदा करती हैं। जैसे मिस रोशनी, भिखारीन, कोरोना देवी, वह डॉक्टर बेटा आदि। कार्यक्रम के अध्यक्ष पंडित मोहन प्रसाद चतुर्वेदी ने अपने व्यक्तव्य में कहा दिनेंद्र दास जी संत हैं। उन्होंने जो कुछ लिखा लोगों के हित के लिए लिखा हैं।
सीताराम श्याम पैरी ने अपने उद्बोधन में कहा ,खजाने की चाबी पुस्तक में 101 कहानियों का संग्रह है। नाम के अनुरूप खजाने के ताले को खोलकर सद्मार्ग रूपी रत्न को प्राप्त किया जा सकता है। कार्यक्रम का संचालन भरत बुलंदी ने किया ने किया।इस अवसर पर अमिता रवि दुबे, कवित्री, सुषमा आडिल शिक्षिका ,नगरी, सीमा साहू कवित्री, नेमीन साहू भिलाई,
डी.डी. गजेंद्र ,अध्यक्ष रचना साहित्य समिति, धर्मेंद्र श्रवण शिक्षाश्री साहित्यकार, दल्ली राजहरा, देवघर साहू वरिष्ठ साहित्यकार
करहीभदर, डॉक्टर एच.डी. महमल्ला गुरुर, पुनूराम गुरुपंच खुंदनी, बेणीराम सार्वा पैरी,
अरुण कुमार साहू सरपंच ग्राम भानपुरी, लीलाराम डड़सेना सरपंच करहीभदर। आदि सैकड़ो की संख्या में श्रोता उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में कबीर आश्रम के व्यवस्थापक संत सुशांत साहेब ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आश्रम आप सबका है। आप लोगों की श्रद्धा, भक्ति और प्रेम संतों के प्रति बनी रहे। आप सबको मेरी शुभकामना है कि आप स्वस्थ और मस्त रहे।
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