गोलू कैवर्त संभाग प्रमुख छत्तीसगढ़ बलौदाबाजार : जनपद पंचायत बलौदाबाजार के अंतर्गत ग्राम पंचायत डोंगरा है जो कि तहसील लवन से महज पांच किलोमीटर की दूरी पर बसा है।यहां वर्मा समाज की बाहुल्यता है ,इसके अलावा यहां जिला प्रशासन एवं केंद्रीय योजना का सीधा लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से जल जीवन मिशन योजना के तहत ग्राम डोंगरा में कई महीनों से पानी टंकी का निर्माण कार्य शुरू इस उद्देश्य से किये गए थे ताकि ग्रामीणों को पेयजल के लिए मिलो सफर कर अन्यत्र जाने की जरुरत नहीं पड़े पानी उन्हें नल जल कनेक्शन से घर में ही प्राप्त होता रहे लेकिन यहां योजना असफलता को प्राप्त होता दिख रहा है जिसका प्रमुख वजह ग्राम सरपंच एवं सचिव की उदासीनता के साथ साथ पानी टंकी निर्माण अधर में है।ग्रामीणों ने बताया कि उक्त जनहित कार्यों में सरपंच एवं सचिव रूचि नहीं ले रहे हैं नहीं निर्माण एजेंसी ठेकेदार रूचि ले रहे हैं ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की योजना को धत ,असफल बताने में सरपंच एवं सचिव खूब मेहनत करते हुए दिख रहे हैं।ग्राम सचिव को पानी टंकी का निर्माण कितने लाख की लागत से कौन सी एजेंसी निर्माण कार्य को लिए इसके जानकारी भी नहीं है।इसके अलावा ग्रामीणों ने बताया कि सरपंच ग्राम विकास के मामलों में कभी ध्यान नहीं देता नहीं जनता से उन्हें कोई मतलब नहीं है।जिसके कारण ग्राम डोंगरा का विकास कुछ वर्षों से ठप्प है।
निर्माण कार्य के एवज में फर्जी तरीके से शासन प्रशासन की राशि आहरण किये होंगे इनसे भी इंकार नहीं किये जा सकते हैं कि बात ग्रामीणों ने मीडिया को बताया है।अब हमारा न्यूज़ फर्जी तरीके से राशि आहरण किये हैं या नहीं इसकी पुष्टि नहीं करता ये ग्रामीणों की अपनी अपनी बात है।फिलहाल इस मामले पर बताते चलें तो यहां ग्रामीण पानी के एक एक बूंद के लिए हैंड पंप जो कि तालाब किनारे है जहां पानी के लिए सैकड़ों लोगों की भीड़ देखे जा सकते हैं जिससे लाने के लिए पनिहारिन लोगों को काफी लम्बी पैदल चलकर जाने पर मिलती है।इस मामले पर सचिव सुश्री अमरीका कैवर्त ने मीडिया को बताया कि पानी टंकी निर्माण कितने लाख की लागत से हो रहा है कौन कर है इसकी जानकारी नहीं होने की बात कही।जनपद पंचायत सीईओ एम एल मंडावी ने मीडिया से चर्चा में कहा कि आचार संहिता पूर्व निर्माण कार्य क्यों और किस वजह से रुके है जांच करवाते हैं।उपसरपंच शिव वर्मा ने बताया कि करीब 70 लाख से ऊपर का पानी टंकी बन रहा था जिससे ग्रामीणों को पानी की समस्या से निजात मिलता लेकिन सरपंच की अरुचि से कार्य लटका हुआ है।
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