रिपोर्ट - राजेश कैवर्त ,मस्तूरी : संस्कृतियों की धरोहरों को समेटे हुए बिलासपुर जिले का नगर पंचायत मल्हार है,यहां अरपा, लीलागर और शिवनाथ नदी के बीच बसा मल्हार कलचुरियों का गढ़ रहा है। यहां मां डिडनेश्वरी देवी का प्रसिद्ध मंदिर है। डिडनेश्वरी देवी की मूर्ति कलचुरि संवत 900 की है। शुद्ध काले ग्रेनाइड से बनी मां डिडनेश्वरी की प्रतिमा लोगों की आस्था का केंद्र है। डिडिनदाई शब्द का अर्थ छत्तीसगढ़ में कुमारी देवी होता है। कुंवारी रूप शैलसुता शिव को पति के रूप में पाने के लिए तपस्या रत हुई। पद्मासन में विराजित तपोमुद्रा वाली देवी की भव्य गंभीर मुखाकृति है, जिनके नेत्र मूंदे हुए, सौम्य में मुद्रा भाव में लीन, सिंह छाल में विराजित हैं, यहां हर शाल दो पछ मे मनोकामना ज्योति कलश लाखो की संख्या मे दीप प्रज्वलित होते है,ऐसी मान्यता है की जो भी श्रद्धालू अपनी अस्था लेकर आते है उनकी मनोकामना माँ डिंडनेश्वरी पुरी करती है ,जतनराम कैवर्त ने बताया की इस बार भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मनोकामना ज्योति प्रजवलित होंगे ।
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