प्राइवेट बैंकों की मनमानी से लोग परेशान, क्या सरकार और प्रशासन की मानिटरिंग नहीं?

प्राइवेट बैंकों की मनमानी से लोग परेशान, क्या सरकार और प्रशासन की मानिटरिंग नहीं?

परमेश्वर राजपूत,गरियाबंद :  कुछ प्राइवेट बैंकों के मनमाने रवैया के चलते उस बैंकों से जुड़े हितग्राही परेशान हैं। ताज़ा मामला छुरा क्षेत्र कृषक कृष्ण कुमार साहू और कुलेश्वर प्रसाद साहू का है जो पांडुका स्थित एचडीएफसी बैंक से केसीसी ऋण लिया था जिसे कृषक की मानें तो 2023 में पूर्ण रूप से पटाकर खाता बंद कर दिया था और ऋण पुस्तिका में खाता क्लोज कर अनापत्ति प्रमाणपत्र बैंक के द्वारा दे दिया गया है। बावजूद इसके भुईयां एप में बंधक नहीं हटा है जिससे कृषक को खाद बीज लेने और अन्य कार्य हेतु काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है और सामने अभी कृषि कार्य का समय आ गया है जिसके चलते वे काफी परेशान हैं पिछले एक साल से वे बैंक के चक्कर लगाने मजबूर हैं लेकिन उनका जमीन का बंधक बैंक के द्वारा नहीं हटाया गया है।

वहीं आज गरियाबंद कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर उन्होंने जनदर्शन में आवेदन लगाकर बंधक हटाने कलेक्टर से अपील की है।वहीं पिछले कुछ दिन पूर्व पाट सिवनी ग्राम के महिला समूह के द्वारा छुरा के बैंक आफ बड़ौदा के खिलाफ थाने पहुंच शिकायत दर्ज कराई गई थी कि बैंक में लोन का पैसा पटाकर उनके पास रसीद भी है लेकिन उनके खाते में लोन का पैसा जमा नहीं हुआ है जिस पर जांच कर कार्रवाई की मांग की गई है।सवाल यह उठता है कि क्या ये प्राइवेट बैंकों पर प्रशासन और सरकार का नियंत्रण नहीं? या इन बैंकों की मनमानी पर प्रशासन की ठोस कार्रवाई नहीं? आखिर कई महिलाएं और किसान इनके चंगुल में इसी प्रकार फंसे रहेंगे या प्रशासन इनके इन समस्याओं से मुक्त कब तक करा पायेगी यह एक गंभीर और सोचनीय विषय है।










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