नायाब तहसीलदार की उदासीनता के चलते ढकोसला साबित हो रहा राजस्‍व शिविर : मदन साहू

नायाब तहसीलदार की उदासीनता के चलते ढकोसला साबित हो रहा राजस्‍व शिविर : मदन साहू

 

राजनांदगांव :  राजस्‍वों मामलों के निराकरण के लिए लगाए जा रहे शिविर माखौल साबित हो रहे हैं। जिला किसान कांग्रेस अध्‍यक्ष मदन साहू ने आरोप लगाया कि, नायाब तहसीलदार की उदासीनता से ऐसे शिविर औचित्‍यहीन साबित हो रहे हैं। वे जन सरोकार के राजस्‍व के मुद्दों से जुड़ी परेशानियों को लेकर गंभीर नहीं हैं और इसके चलते ऐसी स्थिति निर्मित हो रही है। 

उन्‍होंने कहा कि, इन शिविरों में राजस्‍व निरीक्षक और पटवारियों की मौजूदगी अहम है जबकि वे ही शिविरों में शामिल नहीं हो रहे हैं। उन्‍होंने आरोप लगाते हुए कहा कि, नायाब तहसीलदार भी इस ओर किसी तरह की पहल नहीं कर रहे हैं। अलबत्‍ता वे कहते हैं कि.. एक ही दिन कई जगह शिविर लगते हैं आरआई और पटवारी हर जगह मौजूद नहीं रह सकते। साहू ने कहा कि, जब शिविर में जिम्‍मेदार मौजूद ही नहीं रहेंगे तो शिविर का औचित्‍य ही क्‍या है। उन्‍होंने कलेक्‍टर से इस संदर्भ में संज्ञान लेने और संबंधितों पर कार्रवाई करने की मांग की है। 

जिला किसान कांग्रेस अध्‍यक्ष मदन साहू ने कहा कि, मंगलवार को तुमड़ीबोड़ में राजस्‍व शिविर लगाया गया। क्षेत्र के किसान और सामान्‍यजन अपने कार्यों के लिए यहां जुटे थे। लेकिन शिविर में न ही आरआई मौजूद थे और न ही पटवारी। पूर शिविर के दौरान लोग इनका इंतजार करते रहे। इस संदर्भ में जब नायाब तहसीलदार वसीम खान से बात की गई तो उन्‍होंने सीधे तौर पर आरआई-पटवारियों की गैर मौजूदगी को बहाने में टाल दिया। 

साहू ने कहा कि, क्षेत्र के लोग बंटवारा, नामांतरण और फौती के प्रकरणों के लिए 6-6 महीने से चक्‍कर काट रहे हैं। नायाब तहसीलदार ऐसे आम मामलों में भी फुर्ती नहीं दिखा रहे हैं। मुख्‍यालय में बैठने के प्रशासनिक निर्देशों के बावजूद यह हालात हैं। जिला प्रशासन राजस्‍व मामलों के निपटारे के लिए शिविर पर जोर दे रहा है लेकिन शिविरों का भी कोई मतलब निकल नहीं रहा है और आम जन परेशान ही हो रहे हैं। उन्‍होंने आरोप लगाया कि राजस्‍व महकमा क्षेत्र में बस ईंट भठ्ठा, रेत और मुरुम उत्‍खनन के मामलों में वसूली में जुटा हुआ है। जन समस्‍या से इनका कोई सरोकार नहीं रह गया है। 

साहू ने कहा कि इन मामलों को लेकर वे संभाग आयुक्‍त से शिकायत करेंगे। राजस्‍व के मामलों में देरी के विषय पर संबंधितों पर दंडात्‍मक कार्रवाई होनी चाहिए। लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। खेती किसानी का दौर आने वाला है इससे पहले कई जरुरी कागजात तैयार करवाने होते हैं पर राजस्‍व अमला इसमें कोताही बरत रहा है जो कि अनुचित है।










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