शासकीय भूमि की खरीदी-बिक्री मामले में जिला प्रशासन की भूमिका संदेह के घेरे में

शासकीय भूमि की खरीदी-बिक्री मामले में जिला प्रशासन की भूमिका संदेह के घेरे में


राजनांदगांव :  ग्राम पंचायत सोमनी द्वारा 28 नवंबर, 2023 को कलेक्टर, राजनांदगांव के समक्ष आबादी शासकीय भूमि की कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर खरीदी-बिक्री पर आपराधिक प्रकरण दर्ज कर कार्यवाही की शिकायत की गई थी। आज सात माह बाद भी खरीदी-बिक्री करने वालों पर किसी प्रकार की कोई कार्यवाही नहीं की गई है। यह एक बड़ा सवाल है, आखिर प्रशासन किसके दबाव में है। इस प्रकरण पर डोंगरगांव विधायक एवं पूर्व अध्यक्ष पिछड़ा क्षेत्र एवं विकास प्राधिकरण दलेश्वर साहू ने भी विधानसभा में प्रश्न लगाया था, जिसमें प्रशासन ने उन्हें गोल-मोल जानकारी प्रदान कर कार्यवाही प्रगतिरत होना बताया गया, लेकिन कार्यवाही अभी तक शून्य हैं, इसकी शिकायत वर्तमान सांसद संतोष पांडे से भी की गई थी। सांसद ने तात्कालिक कलेक्टर से टेलिफोनिक चर्चा कर एवं पत्र भेजकर कार्रवाई के लिए लिखित निर्देश दिये थे। पूर्व सांसद अभिषेक सिंह के भी निर्देशों का पालन नहीं किया गया, इससे पता चलता है कि जमीन की खरीदी-बिक्री करने वालों के हौसले कितने बुलंद है। स्थानीय प्रशासन कितना लाचार नजर आता है। इस प्रकरण में फरवरी 2024 में ही तहसीलदार मनीष वर्मा द्वारा प्रतिवेदन अनुविभागीय दंडाधिकारी, राजनांदगांव को प्रस्तुत कर दिया गया, लेकिन वर्तमान एसडीएम अतुल विश्वकर्मा द्वारा अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।

आवेदकों द्वारा बार-बार निवेदन करने पर भी आश्वासन ही दिया जा रहा है, इससे स्थानीय प्रशासन की विफलता ही मानी जाएगी। भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद राजस्व प्रकरणों के निपटारे पर जोर दिया गया है। कई आदेश भी जारी हुए, लेकिन आम नागरिकों से लेकर संवैधानिक संस्थाओं के पदाधिकारियों को भटकना पड़ रहा है। क्या इसे सरकार का प्रशासन पर कसावट का ना होना माना जाए या अधिकारियों की मनमानी। सोमनी में आए दिन लोग शासकीय भूमि पर अतिक्रमण कर रहे है, फिर उसे अन्य व्यक्ति को बेच दे रहे हैं। सोमनी सिंचाई जलाशय की भूमि का बड़ा भाग अतिक्रमण की भेंट चढ़ गया है। सिंचाई विभाग में कई शिकायतें गई है, लेकिन विभाग को कोई लेना-देना नहीं है। इसी प्रकार राजगामी की भूमि का बड़ा भाग अतिक्रमणकारियों ने कब्जा लिया है। स्कूल की भूमि हो या बाजार की भूमि लोगों ने गौठान को भी नहीं छोड़ा है। अब देखना होगा कि आने वाले समय में प्रशासन कुंभकरनीय नींद से जागकर कब और क्या कार्यवाही करता है। तहसीलदार ने अपनी रिपोर्ट में रिक्त पड़ी भूमि के पट्टों को निरस्त कर पंचयात को हैंडओवर करने की बात कही है। शासकीय भूमि की खरीद-फरोख्त करने वालो पर एफआईआर भी नहीं की गई वे खुलेआम घूम रहे है। पटवारी को सस्पेंड कर पूरे प्रकरण को दबा दिया गया।










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