२० लाख का त्रिशुल १२ लाख कैसे हुए उसके भ्रष्टाचार का खुलासा पहले मधुसूदन यादव करें : ओस्तवाल

२० लाख का त्रिशुल १२ लाख कैसे हुए उसके भ्रष्टाचार का खुलासा पहले मधुसूदन यादव करें : ओस्तवाल


राजनांदगांव :  राजनांदगांव शहर की जन-जन की आवाज एवं पूर्व पार्षद हेमंत ओस्तवाल ने एक जारी बयान के माध्यम् से  राजनांदगांव जिले के पूर्व सासंद एवं प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष मधुसूदन यादव के द्वारा निगम आयुक्त को पत्र लिखकर त्रिशुल लगाने की मांग की है लेकिन पूर्व महापौर श्री मधुसूदन यादव और भाजपा के नेता यह भूल गये है कि कांग्रेस शासन काल में त्रिशुल के भ्रष्टाचार के मामले को लेकर महापौर श्रीमती हेमा देशमुख को घेेरा था और आज जब भाजपा की प्रदेश में सरकार बन गई तो पूर्व महापौर मधुसूदन यादव को क्या सांप सूंघ गया है जबकि मानव मंदिर चौक में महाकाल चौक के नाम पर त्रिशुल लगाने एल्डरमेन राशि से लगभग २० लाख रूपये की लागत से यह त्रिशुल का काम एक ठेकेदार को दिया गया और जब इसके भ्रष्टाचार की आवाज मेरे द्वारा और अन्य जनप्रतिनिधियों एवं समाचार पत्रों के माध्यम से लगातार जांच की मांग की गई जबकि भगवान महादेव जी के इस त्रिशुल के भ्रष्टाचार और जगह चयन के नाम पर निगम की महापौर के भ्रष्टाचार को पूर्व सासंद मधूसुदन यादव के द्वारा जनहित और शासन हित में कार्यवाही करवानेे की बजाय हेमा देशमुख की काली करतुतो को जो दबवाया जा रहा है? वह संस्कारधानी धर्म प्रेमियों की छवि को धूमिल करने के बराबर है जबकि अब वही त्रिशुल भाजपा की सत्ता आते ही महापौर निधि से स्वीकृत हो गया है। यदि श्री यादव और भाजपा के नेताओं में सत्ता का पावर यदि जरा भी है तो इस २० लाख के त्रिशुल की लागत का भौतिक सत्यापन के बाद १२ लाख रूपये कैसे हुआ और इस खेल में कौन शामिल है उस सम्पूर्ण मामले की जांच करवाकर दोषी भ्रष्टाचारियों को धर्म के नाम पर जो लुट खसोट मचाके बैठे है उनका नाम सार्वजनिक करें।










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