परिसीमन के आदेश से जनता के हितों का हनन हो रहा था, याचिका पर हाई कोर्ट ने दिया स्टेः कुलबीर छाबड़ा

परिसीमन के आदेश से जनता के हितों का हनन हो रहा था, याचिका पर हाई कोर्ट ने दिया स्टेः कुलबीर छाबड़ा


राजनांदगांव  : साल के अंतिम माह नवंबर-दिसंबर 2024 में होने वाले नगरीय निकाय का चुनाव को लेकर शासन-प्रशासन द्वारा 2011 जनगणना को आधार मानकर नगरीय निकायों के वार्डों का परिसीमन कराया जा रहा है जो हर पहलू से न्यायसंगत उचित नहीं लगा और सत्ता सरकार अपने लोगों को लाभ दिलाने के उद्देश्य परिसीमन कराया जा रहा है जो जनहित की दृष्टि में उचित नहीं है। जिसको लेकर वरिष्ठ पार्षद कुलबीर सिंह छाबड़ा द्वारा परिसीमन के विरोध में उच्च न्यायालय में याचिका दायर की जिस पर उच्च न्यायालय द्वारा मेरी याचिका पर स्टे दिया गया है। इस संबंध में नगर निगम के वरिष्ठ पार्षद कुलबीर सिंह छाबड़ा ने प्रेसवार्ता में जानकारी देते हुए बताया कि नगरीय निकाय के निर्वाचन प्रक्रिया में परिसीमन का आदेश शासन द्वारा निकाले जाने से जनता के हितों का हनन हो रहा था। जिस पर मेरे द्वारा आपत्ति दर्ज कर माननीय उच्च न्यायालय के शरण में जाना पड़ा। मेरी याचिका क्रमांक डब्ल्यूपीसी 3693/2024 के विद्धान वकील रत्नेश अग्रवाल ने की हैं। 

श्री छाबड़ा ने आगे कहा कि 2011 में हुई जनगणना के अनुसार जनसंख्या राजनांदगांव शहर की 1,63,114 है। 2014 के नगरीय निकाय चुनाव में परिसीमन हुआ फिर 2019 के नगरीय निकाय चुनाव में परिसीमन हुआ। 2021 में जनगणना होनी थी जो कि नहीं हुई है। श्री छाबड़ा ने सत्ता पक्ष पर आरोप लगाते हुए कहा कि 2024 वर्तमान में फिर से परिसीमन प्रक्रिया की जा रही है, जब वार्ड 51 है और इन्हीं 51 वार्डों में 1,63,114 की जनसंख्या के आंकड़े को घूमाकर वार्ड के क्षेत्रों को बार-बार बदला जा रहा है, जो कि उचित नहीं है। जब 2011 के बाद जनगणना नहीं हुई है इसलिए वार्ड के विस्तार सुधार के लिए जारी निर्देश के बावजूद जनसंख्या का कोई नया आंकड़ा नहीं है।

इस कारण वार्ड का पुर्नगठन किया जाता है तो आरक्षण भी प्रभावित होगा और शहर के प्रत्येक नागरिकों को वार्ड क्रमांक और क्षेत्र बदलने के कारण वार्ड नं. एवं अपने निवास की जानकारी के लिए फिर से आधार कार्ड, राशन कार्ड, पासपोर्ट और संबंधित सभी उपयोग में होेने वाले दस्तावेजों में सुधारने के लिए फिर से जनता को नया आधार कार्ड, राशन कार्ड बनवाना पड़ेगा, जिससे शारीरिक, आर्थिक और मानसिक परेशानी होगी। ये सब स्थितियां जनहित के दृष्टि में उचित नहीं थी और नियमानुसार भी नहीं है। इस कारण मेरे द्वारा माननीय उच्च न्यायालय की शरण में न्याय में जाना पड़ा जिस पर माननीय उच्च न्यायालय द्वारा संज्ञान लेते हुए मेरे अंतरिम राहत के आवेदन को स्वीकार किया है तथा प्रतिवादियों (शासन) को निर्देश दिया है कि इस विषय पर निगम के वार्डों संख्या और सीमा के निर्धारण के संबंध में अंतिम सूची राजपत्र अधिसूचना अगली सुनवाई तक प्रकाशित नहीं किया जाएगा। प्रेसवार्ता में प्रमुख रूप से महापौर हेमा देशमुख, वरिष्ठ कांग्रेसी कमलजीत सिंह पिन्टू, श्रीकिशन खंडेलवाल, रूपेश दुबे, मेहुल मारू, ब्लॉक अध्यक्ष द्वय आसिफ अली, सूर्यकांत जैन, शहर कांग्रेस उपाध्यक्ष मोहम्मद यहया, महामंत्री हनी ग्रेवाल उपस्थित रहे।








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