महादेव की आराधना और त्रिशूल का अनादर: निगम की लापरवाही या प्रशासनिक उदासीनता?

महादेव की आराधना और त्रिशूल का अनादर: निगम की लापरवाही या प्रशासनिक उदासीनता?

राजनांदगांव : राजनांदगांव महादेव के भक्तों की आस्था और धार्मिक प्रतीक त्रिशूल को लेकर एक गंभीर मुद्दा सामने आया है। निगम द्वारा बनवाए गए त्रिशूल, जो महादेव की आराधना के लिए बनवाए गए थे, अब कचरे के ढेर में पड़े हुए हैं। यह दृश्य भक्तों के लिए बेहद आहत करने वाला है और प्रशासन की लापरवाही को उजागर करता है।

 धार्मिक आस्था और त्रिशूल का महत्व

महादेव की आराधना में त्रिशूल का विशेष महत्व है। त्रिशूल न केवल एक हथियार है, बल्कि यह महादेव के तीन प्रमुख गुणों - सृजन, संरक्षण और विनाश - का प्रतीक भी है। इस प्रतीक के कचरे में पड़े होने से भक्तों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची है।

निगम की लापरवाही

निगम द्वारा बनवाए गए त्रिशूलों को धार्मिक स्थलों पर उचित तरीके से स्थापित करने के बजाय कचरे के ढेर में फेंक दिया गया है। यह न केवल महादेव के भक्तों के प्रति अनादर है, बल्कि यह प्रशासन की उदासीनता को भी दर्शाता है। 

प्रशासनिक उदासीनता

यह मुद्दा केवल निगम की लापरवाही का परिणाम नहीं है, बल्कि प्रशासन की उदासीनता का भी प्रमाण है। धार्मिक स्थलों की देखभाल और उनके प्रतीकों का संरक्षण प्रशासन की जिम्मेदारी है। परंतु इस मामले में प्रशासन की निष्क्रियता स्पष्ट रूप से दिख रही है।

भक्तों की प्रतिक्रिया

महादेव के भक्तों ने इस घटना पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। उनका कहना है कि धार्मिक प्रतीकों के साथ ऐसा व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने निगम और प्रशासन से तुरंत कार्रवाई की मांग की है और त्रिशूलों को उचित स्थान पर स्थापित करने की अपील की है।

निष्कर्ष

यह घटना धार्मिक आस्था के प्रतीकों के प्रति समाज और प्रशासन की जिम्मेदारी पर सवाल उठाती है। धार्मिक प्रतीकों का सम्मान करना और उनकी सही देखभाल करना सभी की जिम्मेदारी है। उम्मीद है कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेगा और महादेव के त्रिशूलों को उचित सम्मान दिलाने के लिए आवश्यक कदम उठाएगा। यह हमारे आस्था का त्रिशूल जब तक कहीं स्थापित न हो उसे एक सुंदर और स्वच्छ जगह पर नहीं रखा जा सकता्?










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