बांग्लादेश में हिन्दुओं पर हो रहे हमले को लेकर देश भर में क्रोध व्याप्त है। जगह-जगह विरोध प्रदर्शन हो रहे है। इस पर भाजयुमों के नेता अंकित गढ़वाल ने बताया कि आज की स्थिति में बांग्लादेश के कई शहरों में हजारों हिन्दू सड़कों पर उतरे अपनी दुर्दशा पर विरोध जता रहें है, यहां तक कि अमेरिका में भी हिन्दुओं ने उठाई आवाज़। लेकिन इन सबके बावजूद देश के विपक्षी किसी भी पार्टी ने अभी तक एक शब्द नहीं बोला। ये इनके समुदाय विशेष के प्रति तुष्टिकरण की राजनीति की परिचायक है।
गाज़ा, फिलिस्तीन जैसे वैश्विक मुद्दों पर गला फाड़ चिल्लाने वाले विपक्षी पार्टीयों के गले से आज आवाज़ नहीं निकल रही। क्या हिंदुओ के प्रति उनके हृदय में किसी भी प्रकार की करुणा नहीं है ? चुनाव के समय विपक्ष के राहुल गाँधी हिन्दूओं के हितैषी बने फिरते थे, सर्वधर्म समभाव की बात करने वाले आज किसी कोने में दुबके पड़े है और एक शब्द भी बोलने से बच रहें ताकि उनकी समुदाय विशेष के प्रति तुष्टिकरण की राजनीति चलती रहे।
श्री गढ़वाल ने बताया कि बांग्लादेश की हिंसा आरक्षण के मुद्दे पर ही हुई। इस मुद्दे से सबक लेते हुए बाकी देशों के राजनेताओं को सीख लेनी चाहिए। जब महान विचारक, भारतरत्न, श्रद्धेय बाबा साहब अम्बेडकर जी ने भारत के परिपेक्ष्य में शोषितों एवम वंचितों के लिए आरक्षण की उचित व्यवस्था पूर्व में ही कर दी है,जिसका अनुपालन भी यथावत हो रहा तब यही राहुल गाँधी देश को जातिगत आरक्षण के मुद्दे पर झोंकने के लिए बार-बार जातिगत बंटवारे का ज़हरीला फॉर्मूला लागू करने की बात करते रहते है।
क्या विपक्ष के नेता अपनी अल्पज्ञता से भारत को भी बांग्लादेश की तरह हिंसा की आग में झोंकना चाहते है ?
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