महापौर की निष्कृता व आयुक्त की उदासीनता के चलते निगम कर्मचारी को वेतन के लिए करना पड़ रहा धरना प्रदर्शन  :शिव वर्मा

महापौर की निष्कृता व आयुक्त की उदासीनता के चलते निगम कर्मचारी को वेतन के लिए करना पड़ रहा धरना प्रदर्शन  :शिव वर्मा

कहा - एक करोड़ का पसरा बैठने वाले कोई नहीं
    
 

राजनंदगांव  :  नगर निगम के पूर्व अध्यक्ष शिव वर्मा ने बताया कि कांग्रेस के 5 साल एवं महापौर तथा निगम प्रशासन कभी भी कर्मचारियों की वेतन के लिऐ पहल नहीं किया। वहीं दूसरी तरफ करोड़ों की लागत से बने पसारा में 4 साल में एक दुकान भी नहीं लगा। जहां-जहां पसारा बना है। वहा पर दारु पीने का अड्डा बन गया है। निगम कर्मचारियों को अपने वेतन के लिए धरना प्रदर्शन करने मजबूर है। निगम के महापौर 5 वर्ष में कर्मचारियों को ठीक समय में वेतन मिले कभी भी पहल नहीं किया। उन्होंने कहा कि निगम की माली हालत के लिए  महापौर जिम्मेदार है। गडबो नवा राजनांदगांव का सपना दिखाया पर कुछ भी नहीं हुआ। राजनांदगांव और पीछे हो गया। निगम प्रशासन एवं महापौर निगम का बढ़ाने के लिए कोई ठोस पहल नहीं किया। बल्कि सरकार की तरफ आस लगाए बैठे हैं। निगम की दुकानों से तीन करोड़ रूपया अधिक राशि लेना है। कई दुकान बिना अनुबंध के चल रहा है। दुकान मिलने के बाद दुकानदार दूसरे को दुकान देकर किराए के पैसे कमा रहे हैं। निगम को चूना लगा है। निगम के अधिकारी ऐसे दुकानदार पर कार्रवाई करने के बजाय सीधे-साधे लोगों की दुकान पर सील करता है।निगम प्रशासन महापौर कि ईच्छा सकती हो तो कर्मचारियों को बिना आंदोलन धरना प्रदर्शन की वेतन दे सकते हैं। श्री वर्मा ने आगे बताया कि लगातार 2 दिन से शहर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह चौपट हो गया है। परन्तु महापौर निगम प्रशासन सफाई कर्मचारीयों से बातचीत कर उनकी समस्या का समाधान कैसा हो सकता है। उनका रास्ता निकालना चाहिए। इस दिशा में पहला करना चाहिए। निगम प्रशासन  शासन प्रशासन एवं चुने हुए जनप्रतिनिधि से चर्चा करना चाहिए।










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