छत्तीसगढ़ की संस्कृति में तीजा-पोरा का अपना अलग महत्व  :हारुन मानिकपुरी  

छत्तीसगढ़ की संस्कृति में तीजा-पोरा का अपना अलग महत्व  :हारुन मानिकपुरी  

 राजनांदगांव:- छत्तीसगढ़ में तीजा पोरा का त्योहार मनाया जा रहा है। पोरा के दिन घरों में उत्साह से जांता-पोरा और मिट्टी के नांदिया बैलों की पूजा की जाती है। और किसान घर को धन धान्य से परिपूर्ण होने और अपने अच्छी फसल प्राप्ती के लिए पूजा अर्चना करते हैं। भादो महिना के अमावस्या तिथि को मनाया जाने वाला यह पोला त्योहार , फसलों के बढ़ने की खुशी में किसानों द्वारा बैलों की पूजा अर्चना कर कृतज्ञता ज्ञापित करने के लिए यह त्योहार मनाया जाता है।

छत्तीसगढ़ की संस्कृति में तीजा-पोरा त्योहार का अपना अलग महत्व है।  युवा लोग कबड्डी, खो-खो आदि खेलते हैं और मनोरंजन करते हैं। छत्तीसगढ़ में इस लोक त्योहार पर ठेठरी, खुरमी, मुठिया, गुजिया, पूड़ी,बड़ा,मुरकू, जैसे कई छत्तीसगढ़ी पकवान बनाए जाते हैं। इन पकवानों को सबसे पहले पूजा कर भोगी लगाया जाता है। इसके बाद घर के सदस्य प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं।










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