तारीख के ऊपर तारीख सुनवाई जारी,अब तक पत्रकार उमेश राजपूत हत्याकांड में असफल जांच एजेंसियां आखिर क्यों?

तारीख के ऊपर तारीख सुनवाई जारी,अब तक पत्रकार उमेश राजपूत हत्याकांड में असफल जांच एजेंसियां आखिर क्यों?

परमेश्वर राजपूत, गरियाबंद :  मामला छुरा नगर के पत्रकार उमेश राजपूत हत्याकांड का है और वे अपने निवास पर पांच लोगों की उपस्थिति में समाचार लिख रहे थे तभी किसी अज्ञात अपराधियों के द्वारा गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। घटना 23 जनवरी 2011 का है जब थाने से कुछ ही फलांग की दुरी पर रिहायशी इलाके में शाम लगभग 6.30 बजे बजे दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। शुरुआती जांच लगभग चार साल तक स्थानीय पुलिस ने की थी लेकिन अपराधियों को पकड़ने में असफल रही वहीं राजपूत के परिजनों ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर इस हत्याकांड की जांच सीबीआई से कराने की मांग की थी जिसके बाद पिछले कई वर्षों से इस घटनाक्रम की जांच सीबीआई कर रही है।

लेकिन अभी तक इस हत्याकांड में किसी को सजा नहीं हो पाया है। वहीं हम परिजनों की मानें तो इस घटनाक्रम से जुड़े कई साक्ष्य थाने के मालखाने से गायब मिले हैं जो यह दर्शाता है कि इस हत्याकांड में किसी प्रभावशाली लोगों का हाथ है। घर से घटना के समय पांच लोग उपस्थित थे उसके बाद भी किसी ने कुछ नहीं देखा ये भी बड़ी चौंकाने वाली बात प्रतीत होता है। घटना के 13 साल बाद भी साक्ष्य गायब करने वाले अधिकारी एवं किसी अन्य अपराधी को अब तक सजा नहीं हो पाने और तारीख के ऊपर तारीख की सुनवाई को देखते हुए परिजनों ने कहा कि यह एक सोची समझी और प्लानिंग कर की जाने वाली हत्या है जिस सही जांच और त्वरित सुनवाई व कार्यवाही हो तो कई प्रभावशील लोगों का नाम सामने आ सकता है। वहीं यह घटना 2011 में जब छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार थी तब घटित हुआ था जिसके बाद पांच साल तक प्रदेश में कांग्रेस की सरकार रही और आज फिर से प्रदेश में भाजपा की सरकार कार्यरत है पर किसी भी सरकार के राज में इस मामले पर विशेष संज्ञान नहीं लिया गया आखिर क्यों? वहीं स्थानीय पुलिस थाने के माल खाने से कई महत्वपूर्ण सबुत गायब मिले उस पर अब तक किसी पुलिस अधिकारी को सजा क्यों नहीं हो पाया? ऐसे भी इस घटनाक्रम में परिजनों की मानें तो कई महत्वपूर्ण बिंदु है जिससे अपराधियों तक पहुंचा जा सकता है पर जांच एजेंसियों के हाथ अब तक क्यों खाली है और किसी अपराधी को आज 13 साल बाद प्रशासन सजा दिलाने में क्यों असफल है यह आज भी एक बड़ी गंभीर और सोचनीय विषय है।










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