नवंबर की इस तारीख को है गणाधिप संकष्टी चतुर्थी, नोट कर लीजिए, पूजन मुहूर्त और विधि

नवंबर की इस तारीख को है गणाधिप संकष्टी चतुर्थी, नोट कर लीजिए, पूजन मुहूर्त और विधि

18 नवंबर को संकष्टी गणेश चतुर्थी का व्रत रखा जाएगा। ये व्रत सुबह से लेकर शाम को चंद्रोदय होने तक किया जाता है। बता दें संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत का पारण चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद किया जाता है। प्रत्येक महीने के कृष्ण और शुक्ल, दोनों पक्षों की चतुर्थी को भगवान गणेश की पूजा का विधान है। कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी, जबकि शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक श्री गणेश चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्री गणेश की उपासना बड़ी ही फलदायी मानी जाती है। 

संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत का महत्व

संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी का अर्थ होता है- संकटों को हरने वाली। भगवान गणेश बुद्धि, समृद्धि और सौभाग्य को देने वाले हैं। इनकी उपासना शीघ्र फलदायी मानी गई है। कहते हैं कि जो व्यक्ति संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी का व्रत करता है, उसके जीवन में चल रही सभी समस्याओं का समाधान निकलता है और उसके सुख- सौभाग्य में वृद्धि होती है।

इन मंत्रों का करें जाप- 

  1. वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
  2. ॐ श्री गं गणपतये नम:
  3. श्री गणेशाय नम:

  4. ॐ वक्रतुंडा हुं

  5. ॐ एकदन्ताय विहे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्तिः प्रचोदयात्

संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत 2024 मुहूर्त और चंद्रोदय का समय

  • मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी का आरंभ- 18 नवंबर 2024 को शाम 6 बजकर 55 मिनट से
  • मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी का समापन- 19 नवंबर को शाम 5 बजकर 28 मिनट पर
  • संकष्टी चतुर्थी के दिन चंद्रोदय का समय- शाम 7 बजकर 39 मिनट पर 







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