क्यों उठाया ये खौफनाक कदम?  माँ ने अपने ही बेटे को उतारा मौत के घाट

क्यों उठाया ये खौफनाक कदम? माँ ने अपने ही बेटे को उतारा मौत के घाट

मुंबई :  मुंबई में एक दर्दनाक मामला सामने आया है। यहां बांद्रा ईस्ट के खेरवाड़ी में एक मां ने अपने 10 वर्षीय बच्चे की मोबाइल चार्जर के तार से गला घोंटकर हत्या कर दी। घटना के बाद से पूरे इलाके में सनसनी का माहौल है। परिवार का दावा है कि महिला सिजोफ्रेनिया से पीड़ित है। पिछले डेढ़ साल से उसका इलाज भी चल रहा है। हालांकि पुलिस ने महिला को गिरफ्तार कर लिया है।

पति आबकारी विभाग में उप सचिव
जानकारी के मुताबिक महिला खेरवाड़ी में अपने पति और 14 वर्षीय बेटी व 10 साल के बेटे के साथ रहती थी। पति आबकारी विभाग में उप सचिव के पद पर तैनात हैं। घटना के दौरान पति ड्यूटी गया था। घर पर महिला और उसके दोनों बच्चे ही थे। महिला रात करीब 8 बजे अपने बेटे को बेडरूम में ले गई और अंदर से दरवाजा बंद कर दिया।

बेटी ने दरवाजा खटखटाया... मगर मां ने नहीं खोला
बेडरूम से आवाज आने के बाद बेटी ने दरवाजा खटखटाया। मगर मां ने नहीं खोला। इसके बाद लड़की ने अपने पड़ोसियों को बुलाया। मगर महिला ने तभी दरवाजा नहीं खोला। पड़ोसियों ने महिला के पति को मामले की जानकारी दी। उन्होंने तुरंत खेरवाड़ी पुलिस को मामले की सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने जब दरवाजा खोला तो उसके होश उड़ गए। महिला चार्जर के तार से बेटे का गला घोंट चुकी थी।

पुलिस की मदद से बच्चे को तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल पहुंचाया गया। जहां जांच के बाद डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। खेरवाड़ी पुलिस स्टेशन के एक अधिकारी के बताया कि पूछताछ के दौरान पता चला कि महिला सिजोफ्रेनिया से पीड़ित है।लगभग डेढ़ साल से उसका इलाज चल रहा है। थाने के वरिष्ठ निरीक्षक कविदास जांभले ने कहा कि बीएनएस की धारा 103(1) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

डॉक्टर ने क्या कहा?
हेल्थ स्प्रिंग ऑर्गनाइजेशन से जुड़े प्रसिद्ध मनोचिकित्सक डॉ. सागर मुंदादा ने कहा कि महिला द्वारा अपने 10 वर्षीय बेटे की हत्या करना बहुत दुखद है। सामान्य मानसिक स्थिति में कोई भी मां ऐसा नहीं करेगी। इससे यह संकेत मिलता है कि वह मानसिक बीमारी से पीड़ित है।

उन्होंने  कहा कि अगर वह सिजोफ्रेनिया से पीड़ित थी तो शायद उसका इलाज ठीक से नहीं चल रहा था। यह भी हो सकता है कि मरीज ठीक ढंग से दवा ही नहीं ले रही थी। कई बार सामान्य व्यवहार की वजह से परिवार को लगता है कि मरीज ठीक हो रहा है। मगर वह बीमारी बना होता है।







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