कन्नौज : एक वक्त था जब कन्नौज में किसान बड़े पैमाने पर सूरजमुखी की खेती करते थे, लेकिन वक्त के साथ आलू और मक्का की खेती ने उसकी जगह ले ली. अगर आज भी किसान सूरजमुखी की खेती करें तो मक्के की फसल से कई गुना ज्यादा लाभ पा सकते हैं. इससे कन्नौज में पानी की समस्या से भी निपट सकते हैं. यहां दो ब्लॉक डार्क जोन में चले गए हैं और कन्नौज सदर भी पानी की कमी से डार्क जोन में जा रहा है. ऐसे में आने वाला समय कठिन है. सूरजमुखी की खेती न सिर्फ पानी बचाती है बल्कि किसानों को बहुत लाभ दे सकती है. सूरजमुखी का तेल अच्छे रेट में बिकता है.
खेती का समय
सूरजमुखी की खेती करने का समय फरवरी माह से शुरू होकर 10 मार्च तक रहता है. कन्नौज के कृषि विभाग में इस बार 25 क्विंटल बीच आया है. ऐसे इच्छुक किसान जो सूरजमुखी की खेती करना चाहते हैं वे अपना पंजीकरण करा लें ताकि उन्हें आने वाली किसी भी स्कीम में लाभ मिल सके. कृषि अधिकारी के अनुसार, मक्के की फसल की अपेक्षा सूरजमुखी की फसल में ज्यादा लाभ है. इसमें पानी की बचत भी होती है और तीन महीने में ये फसल तैयार हो जाती है.
सूरजमुखी का तेल बहुत कारगर है. हृदय रोगियों के लिए इसका खूब प्रयोग होता है. कन्नौज में आयुष्मान रिफाइनरी ने कहा है कि अगर 200 क्विंटल की फसल मिलती है तो वे किसानों से उसे खरीद लेंगे क्योंकि 200 क्विंटल की फसल उनके मानक में आती है.
होगी डिमांड
जिला कृषि अधिकारी आवेश कुमार ने बताया कि सूरजमुखी की खेती के लिए कन्नौज जिला बहुत फेमस था. छिबरामऊ से लेकर सिकंदरपुर जीटी रोड के किनारे बड़े पैमाने पर किसान सूरजमुखी की खेती करते थे, लेकिन वक्त के साथ इसकी जगह कुछ फसलों ने ले ली. लेकिन आज भी मक्का की अपेक्षा सूरजमुखी की फसल में ज्यादा लाभ है. सूरजमुखी का तेल अन्य तेल की अपेक्षा बहुत ही स्वादिष्ट और हेल्दी है. मार्केट में इसकी डिमांड आने वाले समय में खूब होगी.

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