रायपुर : गर्मी के मौसम में कद्दू वर्गीय सब्जियों की मांग बढ़ जाती है, जिससे किसानों को अच्छा लाभ मिल सकता है. इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के अनुसंधान सह संचालक डॉ. धनंजय शर्मा के अनुसार, गर्मियों में लौकी, खीरा और करेला जैसी फसलें बाजार में अधिक मांग में रहती हैं, यदि किसान अर्ली फसल की तैयारी करते हैं, तो उन्हें ऊंचे दाम मिल सकते हैं.
इन सब्जियों की खेती से किसानों की आर्थिक स्थिति और भी मजबूत हे सकती है. डॉ. शर्मा ने बताया कि किसान पॉलीथिन बैग में बीज अंकुरित कर जल्द रोपाई कर सकते हैं. इससे फसल जल्दी तैयार होगी और बाजार में ऊंचे दाम मिलने की संभावना बढ़ जाएगी.
उन्नत किस्मों से मिलती है बेहतर पैदावार
छत्तीसगढ़ के मौसम और जलवायु के लिहाज से लौकी की उन्नत किस्मों में वरद और कांशी गंगा प्रमुख हैं, जो 2.5 से 3 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन देती है. वहीं, करेले की पब्लिक सेक्टर और प्राइवेट सेक्टर दोनों में कई उन्नत किस्में उपलब्ध हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, 3 से 5 सेंटीमीटर आकार वाले करेले की बाजार में अधिक मांग रहती है, जबकि हाइब्रिड लंबी वैरायटी की मांग कम होती है. ऐसे में किसानों को 3 से 5 सेंटीमीटर आकार वाले करेले की किस्म का चयन करना चाहिए. इसका फायदा यह है कि पौधे कम समय में तैयार हो जाते हैं और फलन भी शानदार होती है. मामूली देखरेख और कम लागत में किसान बेहतर आमदनी कमा सकते हैं.
बाजार की मांग के अनुरूप करें खेती
प्रदेश के किसान अब पारंपरिक धान की खेती के साथ-साथ सब्जी उत्पादन पर भी ध्यान दे रहे हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है. कद्दू वर्गीय सब्जियों की खेती कर किसान कम समय में अधिक मुनाफा कमा सकते हैं. कृषि विशेषज्ञों की सलाह है कि बाजार की मांग को ध्यान में रखकर फसलों की वैरायटी का सही चयन करें, ताकि अधिकतम लाभ प्राप्त हो सके.
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