पश्चिम बंगाल : पश्चिम बंगाल विधान सभा चुनाव होने में साल भर का वक्त है, लेकिन ममता बनर्जी अपने फायर ब्रांड अवतार में आ गई हैं. अब उन्होंने चौतरफा हमले शुरु कर दिए हैं. बीजेपी पर हमलावर होते होते ममता दी ये भूल गईं कि कुंभ हिंदू आस्था से जुड़ा है. उन्होने जो हमले कुंभ को लेकर बीजेपी पर किए हैं, बीजेपी उसी को हथियार बना कर उनकी घेराबंदी जरुर करेगी.उन्होंने इसे मृत्युकुंभ कह कर हिंदूवादी ताकतों को एक धारदार हथियार दे दिया है. जिसका इस्तेमाल देर सबेर उनके ही खिलाफ होगा.
दरअसल, कुंभ में आस्था और व्यवस्था दो अलग अलग सवाल हैं. इन दोनों की झीनी दीवार लांघने वाले सभी नेताओं के बयान बीजेपी के पाल में ही जाते हैं. कुंभ की व्यवस्था पर तो कोई भी सवाल उठा सकता है, लेकिन आस्था पर सवाल उठाने का एजेंडा अलग होता है. कई नेता अपने वोटरों को रिझाने के लिए कुंभ को ब्राह्मणवादी व्यवस्था का प्रतीक बता कर उस पर प्रहार करते हैं. जैसे लालू प्रसाद यादव. लालू प्रसाद यादव के वोटरों का एक हिस्सा ऐसा है जो इस कर्मकांड का विरोध करता है. उसी तरह से कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकाजुर्न खरगे को भी दलित नेता के तौर पर प्रोजेक्ट किया जाता है. बाबा साहेब अंबेडकर को मानने वाले बहुत सारे लोग धार्मिक कर्मकांड और धर्म के नाम पर आयोजनों का विरोध करते हैं.
यहां ध्यान रखने वाली बात ये है कि कांग्रेस पार्टी की ओर से कुंभ के बारे में कोई टिप्पणी नहीं की गई. उल्टे कांग्रेस के कई नेताओं ने जा कर वहां डुबकी भी लगाई. यहां तक कि लालू जैसा ही वोट बैंक लेकर राजनीति करने वाले अखिलेश यादव भी बाकायदा त्रिवेणी में मज्जन किया. उन्हें आस्थावान ऐसे वोटरों का भी खास ध्यान रखना है और पिता मुलायम सि्ंह यादव को मिले मुल्ला मुलायम के खिताब से भी अपने को बचाना है.
ममता बनर्जी को भी राज्य में आस्थावान वोटरों का खयाल रखना है लेकिन उन्होंने बीजेपी पर हमला करते करते कुंभ को मृत्यु कुंभ कह दिया है. उन्होंने खासतौर से कुंभ में हुई मौतों के बाद उनके परिजनों को आई परेशानी का जिक्र किया. उनका आरोप है कि मरने वालों को डेथ सर्टिफिकेट मेले या उत्तर प्रदेश से नहीं दिए गए. बंगाल सरकार ने उनके पोस्टमार्टम करा कर डेथ सर्टिफिकेट दिए. इसकी वजह बताते हुए उन्होंने ये भी कहा कि बाद में इन मौतों को हार्ट अटैक से हुई मौत बता कर मुआवजा देने से इनकार कर दिया जाएगा.
लेकिन आस्थावान हिंदुओं के सबसे बड़े जमावड़े के लिए ये शब्द कहीं से भी उपयुक्त नहीं लगता. वो भी किसी राज्य का मुख्यमंत्री तो कुंभ के लिए इसका प्रयोग नहीं ही कर सकता. हां, विरोधी दल के नेता कुंभ में व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठा सकते है. अब तक के रिकॉर्ड को देखते हुए कहा जा सकता है कि हिंदूवादी संगठन उनके पूरे बयान में से इसी वाक्य के हिस्से को लेकर हिंदुओं को बताएंगे कि ममता बनर्जी हिंदू विरोधी हैं.
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