बेमेतरा जेल में कैदियों ने गंगाजल से किया स्नान,आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उत्थान की अनूठी पहल

बेमेतरा जेल में कैदियों ने गंगाजल से किया स्नान,आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उत्थान की अनूठी पहल

बेमेतरा टेकेश्वर दुबे : छत्तीसगढ़ सरकार ने जेलों में बंद कैदियों के नैतिक उत्थान और आध्यात्मिक शुद्धि के उद्देश्य से एक अनूठी पहल की है। इस पहल के तहत बेमेतरा जेल के कैदियों को प्रयागराज महाकुंभ से लाए गए पवित्र गंगाजल से स्नान कराया गया। सरकार की इस पहल का मुख्य उद्देश्य कैदियों को आध्यात्मिक लाभ पहुंचाना और उन्हें आत्मशुद्धि का अनुभव कराना है

आज मंगलवार को महाशिवरात्रि से एक दिन पहले, बेमेतरा जेल में विशेष रूप से प्रयागराज से मंगवाए गए गंगाजल को विधिवत पूजा-अर्चना के बाद जल टैंक में डाला गया। इसके बाद सभी बंदियों ने “जय गंगा मैया” के जयघोष के साथ पवित्र स्नान किया। इस दौरान कैदियों के चेहरे पर खुशी और आत्मिक सुकून झलक रहा था।*

  उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा की पहल 
छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के निर्देशन में प्रदेश की विभिन्न जेलों में कैदियों के लिए गंगा स्नान की यह विशेष व्यवस्था की गई है। प्रयागराज महाकुंभ से लाए गए पवित्र जल से कैदियों को स्नान कराकर उन्हें आध्यात्मिक ऊर्जा और सकारात्मकता प्रदान करने की इस पहल की सभी ओर सराहना हो रही है।बेमेतरा जेल के सहायक जेल अधीक्षक डी.सी. ध्रुव के अनुसार, इस आयोजन में कुल 148 बंदियों ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ गंगाजल से स्नान किया।

महाकुंभ का महत्व और इसकी ऐतिहासिक विशेषता

भारत में हर 12 वर्ष में चार प्रमुख स्थानों—प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक में महाकुंभ का आयोजन होता है। इनमें से प्रयागराज महाकुंभ को सर्वाधिक महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यह गंगा, यमुना और सरस्वती नदियों के संगम पर स्थित है। इस बार प्रयागराज में महाकुंभ का 12वां चक्र पूरा हुआ है, जो 144 वर्षों में एक बार आता है। इस कारण इसकी आध्यात्मिक महत्ता और अधिक बढ़ गई है।समाचारों के अनुसार, अब तक 60 करोड़ से अधिक श्रद्धालु प्रयागराज महाकुंभ में आस्था की डुबकी लगा चुके हैं, और यह संख्या निरंतर बढ़ रही है। महाकुंभ में स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति का विश्वास किया जाता है, और इसी भावना से बेमेतरा जेल के कैदियों ने भी इस पवित्र स्नान का लाभ उठाया।

सरकार की पहल की सराहना
कैदियों के आत्मिक कल्याण के लिए उठाए गए इस कदम को समाज में सकारात्मक दृष्टि से देखा जा रहा है। इस अनूठी पहल से कैदियों में आध्यात्मिक जागरूकता बढ़ाने और उनमें नैतिक परिवर्तन लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संदेश दिया गया है।










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