बिलासपुर : छत्तीसगढ़ की बिलासपुर पुलिस ने साइबर अपराधियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की. पुलिस ने तीन करोड़ के साइबर फ्रॉड को अंजाम देने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया. इसके साथ इस इस गिरोह में शामिल बैंक कर्मचारी से लेकर सिम विक्रेता समेत 19 आरोपियों को गिरफ्तार भी किया.
दरअसल, मनी ट्रांसफर नेटवर्क के "म्यूल अकाउंट" के खिलाफ बुधवार को पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की. पुलिस की इस कार्रवाई के दौरान 19 लोगों को गिरफ्तार किया, जिनमें बैंक कर्मचारी और फर्जी सिम कार्ड बेचने वाले लोग भी शामिल हैं. पुलिस के मुताबिक इन बैंक खातों के जरिए करीब 3 करोड़ रुपये के अवैध लेन-देन का खुलासा हुआ है, जिसमें से लगभग 97 लाख रुपये फ्रीज किए गए हैं.
क्या होता है "म्यूल अकाउंट" और "मनी म्यूल"?
"म्यूल अकाउंट" वे खाते होते हैं, जिसका इस्तेमाल साइबर अपराधी ठगी की रकम को ट्रांसफर करने में करते हैं. वहीं, जिनके नाम पर इन खातों को खुलवाया जाता है, उसे "मनी म्यूल" कहते हैं. ये अपराधी नौकरी, इनाम, निवेश, या ऑनलाइन टास्क का लालच देकर लोगों को अपने जाल में फंसाते हैं. इन खातों के जरिए धोखाधड़ी की गई रकम इधर-उधर ट्रांसफर कर दी जाती है, जिससे असली अपराधियों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है.
ऐसे करते थे ठगी?
बिलासपुर पुलिस की कार्रवाई
शिकायत के बाद बिलासपुर पुलिस ने 20 से अधिक स्थानों पर छापेमारी करते हुए 19 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. इस ऑपरेशन में 100 से अधिक पुलिस अधिकारी और कर्मचारी शामिल थे. इस दौरान पुलिस की साइबर टीम ने संदिग्ध बैंक खातों की गहन जांच की और साइबर अपराध पोर्टल के माध्यम से कई फर्जी खातों की पहचान की.
"मनी म्यूल" बनना भी है अपराध
अगर कोई व्यक्ति साइबर अपराधियों के जाल में फंसकर "मनी म्यूल" बन जाता है, तो वह भी अपराधी माना जाएगा और उस पर मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप लग सकते हैं. इसके अलावा, बैंक खाता और संपत्तियां जब्त हो सकती है. साथ ही जेल या भारी जुर्माना भी लगाया जा सकता है. भले ही व्यक्ति अनजाने में शामिल हुआ हो. भारतीय न्याय संहिता की धारा 3(5) के तहत मनी म्यूल भी मुख्य अपराधी के बराबर दोषी होगा.
फ्रॉड से ऐसे बचें?
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