रायगढ़,:- सरकार ने भारतमाला परियोजना में भूअर्जन में गड़बड़ी कर करोड़ों का मुआवजा बांटने वाले एसडीएम को सस्पेंड कर दिया है, लेकिन रायगढ़ जिले का बजरमुड़ा घोटाले पर चुप्पी है। जबकि सरकार की जांच टीम ने जांच रिपोर्ट सौंप दी है। नाम फाइलों में कैद हैं लेकिन कार्रवाई नहीं हो रही है। भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया अब अफसरों के लिए अवैध कमाई का जरिया बन गई है। प्रदेश में कई प्रोजेक्ट ऐसे हो चुके हैं, जिसमें राजस्व अधिकारियों ने ही फर्जीवाड़ा किया। इस तरह के घोटालों के लिए अब रायगढ़ जिला जाना जाता है। यहां कई भूअर्जन घोटाले हुए हैं। इसमें से बजरमुड़ा कांड भी एक है। गारे पेलमा सेक्टर-3 कोल ब्लॉक का आवंटन छग स्टेट पावर जेनरेशन कंपनी लिमिटेड छग को हुआ था। छग में ही कोयले का उपयोग बिजली बनाने के लिए किया जाना था।
इसमें मिलूपारा, करवाही, खम्हरिया, ढोलनारा और बजरमुड़ा में 449.166 हे. पर लीज स्वीकृत की गई। खनिज साधन विभाग ने 8 दिसंबर 2016 को आदेश दिया जिसमें कंपनी को 23 फरवरी 2017 से 22 फरवरी 2047 तक 30 साल की लीज स्वीकृत की गई। इसमें निजी भूमि लीज क्षेत्र के अंदर 362.719 हे. और बाहर 38.623 हे. भूमि पर सरफेस राइट के तहत भूअर्जन किया गया। मतलब 8 दिसंबर 2017 से ही इन गांवों में डायवर्सन, टुकड़ों में खरीदी-बिक्री पर प्रतिबंध लग गया था। प्रभावितों को क्षतिपूर्ति राशि के आकलन के लिए तत्कालीन एसडीएम घरघोड़ा ने सर्वे करवाया। जुलाई 2020 को प्रारंभिक सूचना प्रकाशित की गई। इश्तहार प्रकाशन के बाद भूमिस्वामियों की आपत्ति आई।
22 जनवरी 2021 को अवार्ड पारित किया गया। इसमें केवल बजरमुड़ा के 170 हे. भूमि पर 478.68 करोड़ का मुआवजा पारित किया गया। सीएसपीजीसीएल ने कलेक्टर के समक्ष अपील की तो ब्याज को 32 माह से घटाकर 6 माह का किया गया। इससे मुआवजा 415.69 करोड़ हो गया। परिसंपत्तियों के आकलन भारी भ्रष्टाचार किया गया जिसमें तत्कालीन एसडीएम समेत कई तहसीलदार, आरआई, पटवारी, लिपिक, सरपंच, सचिव, दलाल शामिल हैं। दरअसल कंपनी ने जिन बिंदुओं में आपत्ति की थी, उन पर जांच होनी थी, लेकिन बिना जांच के ही एसडीएम के अवार्ड को पारित कर दिया। इस मामले में अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई जबकि आईएएस रमेश शर्मा के नेतृत्व में जांच रिपोर्ट दी जा चुकी है। हालांकि सभी खातों की जांच नहीं हो सकी है।
सीएसपीजीसीएल के अफसर भी शामिल
मुआवजा घोटाले की वजह से 300 करोड़ का की राशि झूठे सर्वे के आधार पर बांट दी गई। सीएसपीजीसीएल ने 15 बिंदुओं में आपत्ति की थी। अवार्ड को निरस्त करने की मांग की गई थी। भूअर्जन अधिनियम 2013 के नियमों को अनदेखा किया गया। सतही अधिकार के प्रकरण में विधि संबंधी गंभीर त्रुटि की गई है। भूमि एवं उसके परिसंपत्तियों की गणना के बाद उस पर गलत तरीके से ब्याज लगाया गया है। प्रारंभिक अधिसूचना का प्रकाशन 13 जुलाई 2020 को हुआ जिसके बाद भूमि पर कोई भी निर्माण नहीं किया जा सकता, लेकिन कोई रोक नहीं लगाई गई। 25 अप्रैल 2018 से किए गए सर्वे में नए निर्माण को शामिल किया गया। अन्य गांव करवाही, खम्हरिया, मिलूपारा और ढोलनारा में ब्याज की गणना इश्तहार प्रकाशन की तिथि से अवार्ड पारित तिथि के बीच ही की गई है।
खसरा पांचशाला को भी झुठलाया
जांच टीम ने पेड़ों के रूप में दिए गए मुआवजे का खुलासा किया है। सीएसपीजीसीएल ने आपत्ति में कहा था कि प्रत्येक भूमि पर स्थित पेड़ों की प्रजातिवार जानकारी खसरा पांचशाला में दर्ज होती है, लेकिन अवार्ड में इसके विरुद्ध संख्या दर्ज की गई। एक-दो साल पुराने आम के पौधों को भी बिना जांच के 6000 रुपए की दर से गणना की गई है। 58580 नग आम पौधों को 38 रुपए और 48878 नग आम पेड़ों को 6000 रुपए की दर से लिया गया है। कंपनी ने इसे गलत बताया था। तत्कालीन एसडीएम और तहसीलदार ने अपूर्ण मकानों या निर्माणाधीन भवनों के मूल्यांकन में भी मनमानी की। 40 प्रश, 60 प्रश और 75 प्रश तीन वर्गों में मकानों का मूल्य निर्धारण होना था जो नहीं हुआ। भवनों का बाजार मूल्य मनमाने ढंग से आकलन किया गया।
एक एसडीएम को सस्पेंड किया, कई बचे हैं
अभनपुर में भारतमाला परियोजना में गड़बड़ी करने वाले तत्कालीन एसडीएम निर्भय साहू को सस्पेंड किया गया है, लेकिन रायगढ़ में बजरमुड़ा, एनटीपीसी रेल लाइन, ईस्ट कॉरीडोर, महाजेंको, ब्लैक डायमंड, खरसिया एनएच, एनटीपीसी लारा मामले में गड़बड़ी करने वाले अब भी आराम से नौकरी कर रहे हैं। पदोन्नति का लाभ भी सरकार दे रही है।
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