नई दिल्ली : आमलकी एकादशी व्रत इस साल 10 मार्च 2025 को रखा जाएगा। हिंदुओं में एकादशी का विशेष महत्व है। यह दिन भगवान विष्णु की पूजा के लिए समर्पित है। इस तिथि पर भक्त कठोर उपवास रखते हैं और पूजा-पाठ करते हैं। कहते हैं कि जो साधक इस व्रत को रखते हैं, उन्हें श्री हरि की कृपा से कभी परेशान नहीं होना पड़ता है। फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि इस व्रत का पारण किया जाता है।ऐसे में जो लोग इस व्रत का पालन कर रहे हैं, उन्हें इसका पारण विधि अनुसार करना चाहिए, तो आइए इसका नियम और समय जानते हैं।
आमलकी एकादशी पारण विधि
सुबह उठें और स्नान करें। पूजा घर की सफाई अच्छी तरह से करें। भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा करें और उनके वैदिक मंत्रों का जाप करें। इसके बाद उन्हें धनिया की पंजीरी, पंचामृत, ऋतु फल, फूल, मिठाई आदि अर्पित करें। आरती से पूजा का समापन करें। पूजा में हुई गलतियों के लिए माफी मांगे। क्षमता अनुसार, दान करें। फिर चढ़ाए गए प्रसाद से अपने व्रत का पारण करें।
पारण में तामसिक चीजें भूलकर भी न शामिल करें। पूजा और व्रत में हुई गलतियों के लिए क्षमा मांगे। ऐसा करने से आपको व्रत का पूर्ण फल प्राप्त करें।
आमलकी एकादशी पारण समय
हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 09 मार्च को सुबह 07 बजकर 45 मिनट पर होगी। वहीं, इसका समापन 10 मार्च को सुबह 07 बजकर 44 मिनट पर होगा। ऐसे में 10 मार्च को आमलकी एकादशी का व्रत रखा जाएगा। इसके साथ ही इसका पारण 11 मार्च को सुबह 06 बजकर 35 मिनट से 08 बजकर 13 मिनट के बीच होगा। पारण समय के अनुसार करें। साथ ही कुछ दान-पुण्य जरूर करें। इससे व्रत का पूरा फल प्राप्त होगा।

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