राजनीतिक कार्यकर्ताओं को अपने लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए दंडित नहीं किया जाएगा :  उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा

राजनीतिक कार्यकर्ताओं को अपने लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए दंडित नहीं किया जाएगा : उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा

बेमेतरा टेकेश्वर दुबे  : छत्तीसगढ़ सरकार ने लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा और निष्पक्ष शासन की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए विभिन्न जिलों में दर्ज 103 गैर-गंभीर राजनीतिक प्रकरणों की वापसी का निर्णय लिया है। गृह विभाग द्वारा जिलों से प्राप्त रिपोर्ट और विस्तृत समीक्षा के बाद मंत्रिमंडलीय उपसमिति की अनुशंसा पर यह फैसला लिया गया। न्यायालय से विधिवत स्वीकृति मिलने के पश्चात 41 प्रकरणों में अभियुक्तों को राहत प्रदान की गई और संबंधित पुलिस रिकॉर्ड से उनके नाम हटा दिए गए। बेमेतरा जिले के 3 प्रकरण को वापस लिया गया। दिनांक 20 जुलाई 2019 को राहुल टिकरिहा, कोमल, हरीश देवांगन और रोमन पांडेय द्वारा शासकीय शराब दुकान में काला झंडा लेकर प्रदर्शन किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि दुकान अवैध रूप से संचालित हो रही है। इसके बाद आरोपीगण ने शराब दुकान का दरवाजा बंद कर ताला लगा दिया एवं काउंटर को भी बंद कर दिया। साथ ही दुकान में कार्यरत सेल्समेन एवं अन्य कर्मचारियों को भीतर बंद कर बंधक बना लिया, जिससे शासकीय कार्य में बाधा उत्पन्न हुई।इनके विरुद्ध अपराध क्रमांक216/19 पंजीबद्ध किया गया था जिसे न्यायालय द्वारा 13 दिसंबर 2024 को प्रकरण वापसी की स्वीकृति दी गयी। वंही दिनांक 27 दिसम्बर 2021 को ग्राम सरदा के हाई स्कूल प्रांगण में स्पंज आयरन कंपनी द्वारा ग्राम सरदा क्षेत्र में कंपनी स्थापित करने के संबंध में जनसुनवाई मंच का आयोजन किया गया।राहुल टिकरिहा एवं उनके साथियों ने उपस्थित व्यक्तियों में से कुछ को यह कहते हुए मंच तक जाने से रोका कि वे कंपनी के समर्थन में आए हैं। जिसके विरुद्ध अपराध क्रमांक 493/21 पंजीबद्ध किया गया था जिसे न्यायालय द्वारा 14 दिसंबर 2024 को वापस लिया गया। वंही दिनांक 22 फरवरी, 2020 को आयूस शर्मा, बबलू साहू एवं अन्य व्यक्तियों द्वारा अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), साजा के कार्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार पर लगे लोहे के गेट को तोड़कर शासकीय संपत्ति को क्षति पहुंचाई गई। इसके अलावा, आरोपियों ने चैनल गेट के सामने बैठकर उग्र नारेबाजी की और आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करते हुए शासकीय कार्य में बाधा उत्पन्न की तथा सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया जिसके विरुद्ध अपराध क्रमांक 42/20 पंजीबद्ध किया गया। न्यायालय द्वारा 17 दिसंबर 2024 को प्रकरण वापस लिया गया। 

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 उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री  विजय शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सरकार सुशासन की सरकार है। हमारी सरकार में किसी भी निर्दोष के साथ गलत नही होने दिया जाएगा। लोकतंत्र में हर नागरिक को अपनी बात रखने और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार में कई ऐसे राजनीतिक प्रकरण दर्ज किए गए थे, जो केवल लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रयोग का हिस्सा थे। हमारी सरकार की नीति हमेशा यही रही है कि राजनीतिक कारणों से किसी भी निर्दाेष व्यक्ति को झूठे मुकदमों में न फंसाया जाए। इसलिए हमारी सरकार ने निष्पक्षता के साथ इन मामलों की समीक्षा कर ऐसे सभी गैर-गंभीर मामलों को वापस लेने का निर्णय लिया है।

उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा ने आगे कहा कि हमारी सरकार जनता के प्रति जवाबदेह है और किसी भी नागरिक के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं होने दिया जाएगा। यह निर्णय न केवल न्यायसंगत है बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है। विपक्ष की तुष्टिकरण और दमनकारी नीतियों के विपरीत, हमारी सरकार पारदर्शिता, निष्पक्षता और सुशासन में विश्वास रखती है। उपमुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि जो प्रकरण कानून-व्यवस्था को प्रभावित करने वाले या हिंसक गतिविधियों से जुड़े हुए थे, उनकी समीक्षा अलग प्रक्रिया के तहत की गई है। लेकिन जिन मामलों में केवल राजनीतिक विरोध या लोकतांत्रिक आंदोलन हुआ था और किसी प्रकार की हिंसा नहीं हुई थी, उन्हें न्यायालय से स्वीकृति प्राप्त कर वापस लिया गया है। हमारी सरकार की मंशा स्पष्ट है हम जनता के हक की रक्षा करेंगे, लोकतंत्र की भावना को मजबूत करेंगे और राजनीतिक द्वेष के आधार पर लिए गए निर्णयों को सुधारेंगे। छत्तीसगढ़ सरकार जनता की सरकार है और हम किसी भी निर्दाेष व्यक्ति पर बेवजह कानूनी बोझ नहीं डालने देंगे।

राजनीतिक प्रकरणों की वापसी एक विस्तृत और कानूनी प्रक्रिया के तहत की जाती है। सबसे पहले राज्य शासन द्वारा सभी जिलों में दर्ज राजनीतिक प्रकरणों की समीक्षा की जाती है। गृह विभाग द्वारा संबंधित जिलों से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर यह तय किया जाता है कि कौन-से मामले गंभीर प्रकृति के नहीं हैं और जिनमें हिंसक घटनाएं शामिल नहीं हैं। इसके बाद मंत्रिमंडलीय उपसमिति की अनुशंसा उपरांत, प्रकरण को मंत्रिपरिषद में अनुमोदन के लिए प्रस्तुत किया जाता है। अनुमोदन प्राप्त होने के बाद न्यायालय में प्रकरण वापसी का आवेदन प्रस्तुत किया जाता है। न्यायालय द्वारा इस मामले की विधिवत समीक्षा के उपरांत अभियुक्तों को राहत प्रदान करने की अनुमति दी जाती है। न्यायालय की स्वीकृति प्राप्त होने के बाद संबंधित पुलिस रिकॉर्ड से अभियुक्तों के नाम हटा दिए जाते हैं और उन्हें विधिवत मुक्ति प्रमाणपत्र प्रदान किया जाता है। शासन स्तर पर इस निर्णय को लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा और सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है, ताकि आम नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का सम्मान हो और राजनीतिक गतिविधियों के कारण उत्पन्न कानूनी समस्याओं का समाधान किया जा सके।

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