वेदों को कानून की पढ़ाई का हिस्सा बनाया जाए : न्यायाधीश पंकज मित्तल

वेदों को कानून की पढ़ाई का हिस्सा बनाया जाए : न्यायाधीश पंकज मित्तल

 सुप्रीम कोर्ट के जज पंकज मित्तल ने अजीबोगरीब बयान दिया है। दरअसल, पूरा मामला ये है कि, 12 अप्रैल, 2025 को सुप्रीम कोर्ट के 75 साल पूरे होने के अवसर पर भोपाल स्थित नेशनल लॉ इंस्टीट्यूट यूनिवर्सिटी (एनएलआईयू) द्वारा आयोजित कानूनी सम्मेलन में वो अपनी बात रख रहे थे। जिसमें उन्होंने कहा कि, अब समय आ गया है कि हमारे विधि विद्यालय प्राचीन भारतीय विधिक और दार्शनिक परंपराओं को औपचारिक रूप से पाठ्यक्रम में शामिल करें। वेद, स्मृति, अर्थशास्त्र, मनुस्मृति, धम्म और महाभारत तथा रामायण के महाकाव्य केवल सांस्कृतिक कलाकृतियां नहीं हैं। इनमें न्याय, समानता, शासन, दंड, सामंजस्य और नैतिक कर्तव्य के गहरे प्रतिबिंब हैं।

सुप्रीम कोर्ट के जज ने क्या कहा?

अगर हमें भारतीय विधिक तर्क की जड़ों को समझना है तो उनका कर्तव्य अपरिहार्य है।" इसके अलावा, उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा कि, देश की न्यायिक प्रणाली को भारतीय बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं, जिसमें सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों का अनुवाद करके उन्हें क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध कराया जा रहा है। इस प्रयास के तहत, भारत के पिछले मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़ के कार्यकाल में, न्याय की देवी की एक नई प्रतिमा का अनावरण किया गया, जिसमें साड़ी पहनी हुई हैं, तलवार की जगह किताब थामे हुए हैं और उनकी आंखों पर बंधी पट्टी हटा दी गई है।

ये भी पढ़े : मुखिया के मुखारी –हमला झन देबे भगवान,अईसन घोटालेबाज नेता झन देबे

संविधान के साथ-साथ गीता, वेद और पुराण भी होने चाहिए

इस पुस्तक का उद्देश्य संविधान के बारे में बताना है, लेकिन न्यायमूर्ति मिथल ने कहा कि उनका मानना ​​है कि इसमें चार पुस्तकें होनी चाहिए: "संविधान के साथ-साथ गीता, वेद और पुराण भी होने चाहिए। यही वह संदर्भ है जिसमें हमारी न्याय व्यवस्था को काम करना चाहिए। तब मेरा मानना ​​है कि हम अपने देश के प्रत्येक नागरिक को न्याय प्रदान करने में सक्षम होंगे।" न्यायाधीश ने प्रस्ताव दिया कि विधि महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों द्वारा शुरू किया जाने वाला विषय "धर्म और भारतीय विधिक विचार" या "भारतीय विधिक न्यायशास्त्र की नींव" शीर्षक के अंतर्गत हो सकता है, और यह केवल पाठ्य-पुस्तकों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि न्याय के शास्त्रीय भारतीय विचारों और इसके आधुनिक संवैधानिक प्रतिबिंबों के बीच संबंध स्थापित करना चाहिए।

ये भी पढ़े : बंगाल हिंसा पर बोले सीएम योगी,वहां की मुख्यमंत्री चुप..लातों के भूत बातों से नहीं मानेंगे







You can share this post!


Click the button below to join us / हमसे जुड़ने के लिए नीचें दिए लिंक को क्लीक करे


Related News



Comments

  • No Comments...

Leave Comments