वक्फ संशोधन कानून पर सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई, केंद्र सरकार को नोटिस जारी

वक्फ संशोधन कानून पर सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई, केंद्र सरकार को नोटिस जारी

नई दिल्लीः सुपीम कोर्ट में वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई हुई। सीजेआई संजीव खन्ना, जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस केवी विश्वनाथन की तीन जजों की बेंच ने मामले की सुनवाई क। वक्फ अधिनियम के खिलाफ कई विपक्षी दलों और नेताओं द्वारा याचिकाएं दायर की गई हैं, जिनमें कांग्रेस, डीएमके, आम आदमी पार्टी, वाईएसआरसीपी, एआईएमआईएम, आदि शामिल हैं। अखिल भारतीय मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड जैसे गैर सरकारी संगठनों और संगठनों ने भी इसके खिलाफ शीर्ष अदालत का रुख किया है।

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आइए, जानते हैं कि सुनवाई के दौरान किसने क्या-क्या दलील दी।

सुप्रीम कोर्ट ने इन अंतरिम आदेशों को वापस ले लिया है:

  1. जो भी संपत्ति वक्फ घोषित की गई है, जो भी संपत्ति उपयोगकर्ता द्वारा वक्फ घोषित की गई है, या न्यायालय द्वारा घोषित की गई है, उसे गैर-अधिसूचित नहीं किया जाएगा।
  2. कलेक्टर कार्यवाही जारी रख सकते हैं, लेकिन प्रावधान लागू नहीं होगा।

पदेन सदस्य नियुक्त किए जा सकते हैं, उन्हें धर्म की परवाह किए बिना नियुक्त किया जा सकता है, लेकिन अन्य सदस्य मुस्लिम होने चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया

  1. CJI ने पूछा, "वक्फ बाय यूजर का रजिस्ट्रेशन कैसे होगा? यह बताने वाला कहां से आएगा कि वक्फ मैंने किया है? वक्फ कानून का दुरुपयोग होता आया है, लेकिन वक्फ बाय यूजर को पूरी तरह रोक देना सही नहीं लगता। अंग्रेजों के ज़माने में प्रिवी काउंसिल ने भी वक्फ बाय यूजर को मान्यता दी थी।" इस पर एसजी तुषार मेहता ने कहा, "नया कानून मुसलमानों को खुद ट्रस्ट बनाने की अनुमति देता है, और उनके लिए वक्फ को ही संपत्ति सौंपने की बाध्यता नहीं है। सेंट्रल वक्फ काउंसिल में गैर-मुसलमानों के होने से वक्फ के काम पर कोई असर नहीं पड़ता। यह काफी हद तक एक एडवाइजरी संस्था है, और इसमें केंद्र की तरफ से नामित प्रतिनिधि शुरू से हैं। सेंट्रल वक्फ काउंसिल में 2 पूर्व जज भी होंगे।" इस पर सीजेआई ने कहा, "वह गैर-मुस्लिम हो सकते हैं।" एसजी ने जवाब दिया, "इस हिसाब से तो आप भी इस मामले को नहीं सुन सकते।" सीजेआई ने तुरंत कहा, "यह तुलना मत कीजिए। बेंच पर बैठे जज इन बातों से अलग हटकर सुनवाई करते हैं।" एसजी ने कहा, "मैं सिर्फ याचिकाकर्ताओं की उस दलील की व्यर्थता के बारे में समझा रहा था। 22 में से अधिकतम 2 सदस्य ही गैर-मुस्लिम होंगे।" सीजेआई ने पूछा, "क्या हम इस बात को रिकॉर्ड करें?" एसजी ने कहा, "मैं लिखित हलफनामा दे सकता हूं। काउंसिल में शिया और दूसरे वर्गों के मुसलमानों को भी जगह दी गई है। 2 मुस्लिम महिलाओं को भी जगह दी गई है।" सुप्रीम कोर्ट ने इनके बाद नोटिस जारी किया और केंद्र सरकार को दो हफ्ते में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। एसजी ने कहा, "हम दो हफ्ते में जवाब दाखिल कर देंगे।"

    CJI ने कहा कि पिछले वक्फ से जुड़े मुद्दे हैं। मेहता ने कहा कि सिब्बल कहते हैं, यह केंद्र सरकार द्वारा पूरी तरह से हड़प लिया गया है, कृपया 1995 के अधिनियम में धारा 9 को देखें। 2013 के संशोधन के बाद भी हमेशा केंद्र सरकार ही नामांकन करती रही है। एसजी ने कहा कि यहां मसला यह है कि सदस्य नॉन-मुसलिम क्यों है। सीजेआई ने पूछा, "क्या सभी वक्फ बाय यूजर खत्म हो गए हैं?" एसजी ने जवाब दिया, "यह दावा सही नहीं है।" एसजी ने कहा, "अगर कोई हिंदू ट्रस्ट बनाता है तो उसके सदस्यों के हिंदू होने की शर्त रख सकता है। वक्फ बोर्ड की स्थिति अलग है। वह वक्फ संपत्तियों के मैनेजमेंट के लिए होती है।" जस्टिस विश्वनाथन ने कहा, "यह दलील गलत है। हिंदू ट्रस्ट में सिर्फ हिंदू होते हैं, और यहां दूसरे लोग भी हैं।" एसजी ने कहा, "जो वक्फ बाय यूजर संपत्तियां पंजीकृत हैं, उनकी स्थिति में कोई बदलाव नहीं होगा।" सीजेआई ने पूछा, "अनरजिस्टर्ड संपत्ति वक्फ क्यों नहीं रहेगी? इसे सिविल कोर्ट को तय करने दीजिए।" एसजी ने कहा, "1923 से ही रजिस्ट्रेशन को ज़रूरी रखा गया है। सिब्बल ने मुतवल्ली के जेल चले जाने जैसी अवास्तविक दलील दी।" सीजेआई ने कहा, "अंग्रेजों से पहले रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था नहीं थी। पुरानी इमारतों का रजिस्टर्ड वक्फ कैसे हो सकता है?" सीजेआई ने कहा, "जामा मस्जिद भी वक्फ बाय यूजर है।" एसजी ने कहा, "उन्हें इसे रजिस्टर्ड करवाने से कोई नहीं रोक सकता है।" एसजी ने कहा, "कलक्टर की तरफ से सरकारी जमीन की पहचान के खिलाफ दलील जेपीसी में भी रखी गई थी। कलक्टर राजस्व अधिकारी होता है। इसलिए कहा गया था कि उससे ऊंचे पद के अधिकारी को ज़मीन की स्थिति तय करने का जिम्मा दिया जाए।" एसजी ने कहा, "कलक्टर के आदेश के खिलाफ ट्रिब्यूनल जाने का रास्ता खुला है। उसका अध्यक्ष पूर्व डिस्ट्रिक्ट जज होगा। उसमें मुस्लिम विद्वान भी होंगे। ट्रिब्यूनल को सिविल कोर्ट का दर्जा दिया गया है।"

    'यह कानून द्वारा स्थापित किसी चीज को खत्म करने जैसा होगा'

    CJI ने कहा, 'मुझे अब भी मेरा जवाब नहीं मिल पाया है।' इस पर SG मेहता ने कहा, 'अगर वह वक्फ पंजीकृत है, तो मैं उस पर हलफनामे के माध्यम से जवाब देने को तैयार हूं।' CJI ने आगे कहा, 'यह  कानून द्वारा स्थापित किसी चीज को खत्म करने जैसा होगा। आप इसे कैसे पंजीकृत करेंगे? उप-धारा 2 पर गौर करें। जहां तक ‘उपयोगकर्ता द्वारा वक्फ’ का सवाल है, इसे पंजीकृत करना मुश्किल है। आपकी यह बात सही है कि इसका दुरुपयोग किया जाता है, लेकिन आप यह नहीं कह सकते कि ‘उपयोगकर्ता द्वारा’ कोई भी वक्फ वास्तविक नहीं हो सकता। अगर आप इस तरह की संपत्तियों को वक्फ के रूप में चिह्नित करते हैं, तो यह गंभीर समस्या उत्पन्न करेगा। उप-धारा 2 का प्रावधान तो पूरी तरह इसके विपरीत है।' CJI ने आगे टिप्पणी की, 'कोई विधायिका (legislature) अदालत के किसी निर्णय या डिक्री को अमान्य घोषित नहीं कर सकती। आप कानून का आधार भले ही हटा सकते हैं, लेकिन किसी न्यायिक निर्णय को अप्रभावी नहीं ठहरा सकते। वह बाध्यकारी रहेगा।' इस पर मेहता ने कहा, 'मुझे नहीं पता कि ये शब्द क्यों आए हैं। कृपया उस हिस्से को अनदेखा करें। मुस्लिम समुदाय का एक बड़ा वर्ग ऐसा भी है जो खुद को मुस्लिम वक्फ बोर्ड के अधीन नहीं मानना चाहता। अगर कोई मुसलमान दान करना चाहता है, तो वह ट्रस्ट के माध्यम से भी ऐसा कर सकता है।' इसके बाद एसजी और कपिल सिब्बल के बीच थोड़ी बहस शुरू हो गई, जिसे सीजेआई ने रोक दिया।

    'अब यह प्रक्रिया अधिक विस्तृत और न्यायसम्मत हो गई है'

    SG तुषार मेहता ने कहा कि सरकारी ज़मीन से संबंधित मामलों में राजस्व के दृष्टिकोण से adjudication होनी चाहिए। उन्होंने कहा किJPC के समक्ष यह तर्क प्रस्तुत किया गया था कि चूंकि कलेक्टर एक राजस्व अधिकारी होता है, इसलिए उसके ऊपर एक उच्च अधिकारी द्वारा इस प्रक्रिया की निगरानी की जानी चाहिए। इस पर CJI ने टिप्पणी की, 'प्रावधान को पढ़िए, जैसे ही कलेक्टर जांच करने की बात कहता है, क्या यह उचित है? क्या यह प्रक्रिया न्यायोचित है?' मेहता ने जवाब दिया, 'वक्फ के रूप में संपत्ति की स्थिति अभी निलंबित हो सकती है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि उस पर उपयोग रुक जाएगा। यह पूरी तरह से राजस्व प्रक्रिया है। और यदि कोई व्यक्ति यह मानता है कि उसका प्रतिकूल कब्ज़ा है, तो वह उचित उपायों की मांग कर सकता है।' CJI ने इस पर सवाल उठाया, 'लेकिन सिविल मुकदमे पर तो रोक है।' मेहता ने कहा, 'धारा 81 को देखा जाए, वक्फ ट्रिब्यूनल एक न्यायिक निकाय है, जिसमें एक न्यायाधीश और मुस्लिम कानून की जानकारी रखने वाला एक व्यक्ति शामिल होता है। इसमें न्यायिक समीक्षा को समाप्त नहीं किया गया है।' इसके बाद जस्टिस विश्वनाथन ने कहा, 'एसजी साहब, कृपया उपधारा 9 पढ़ें, इसमें यह भी प्रावधान है कि हाईकोर्ट में अपील की जा सकती है।' इस पर मेहता ने जवाब दिया, 'मैं इस बात के लिए आभारी हूं। पहले ट्रिब्यूनल का निर्णय अंतिम माना जाता था, लेकिन अब यह प्रक्रिया अधिक विस्तृत और न्यायसम्मत हो गई है।







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