स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का बयान, हिंदू धर्म के खिलाफ फैसला देने में गर्व महसूस करती है सुप्रीम कोर्ट

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का बयान, हिंदू धर्म के खिलाफ फैसला देने में गर्व महसूस करती है सुप्रीम कोर्ट

ज्योतिष पीठ ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने एक बड़ी टिप्पणी की है, उन्होंने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट हो या कोई और कोर्ट इन्हें हिन्दू धर्म के खिलाफ फैसला देने में गर्व महसूस होता है ,शंकराचार्य ने मुसलमानों को लेकर भी टिप्पणी की है।

अपने बयानों को लेकर चर्चा में रहने वाले शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने एक बार फिर ऐसा बयान दिया है जिसकी चर्चा सोशल मीडिया पर हो रही है, उन्होंने आज जबलपुर प्रवास के दौरान मीडिया से बात करते हुए सुप्रीम कोर्ट पर टिप्पणी की, हिन्दुओं के अपमान की बात करते हुए शंकराचार्य ने ये टिप्पणी की।

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हिंदू धर्मगुरुओं के अपमान पर भड़के

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि मुस्लिम धर्म गुरु से जब प्रधानमंत्री मिलते हैं तो उन्हें ऊपर बैठाते है और खुद नीचे बैठते हैं अज जब हिंदू धर्म गुरु से मिलते हैं तो नेता उसके बराबर से बैठते हैं ऐसा क्यों? हिन्दुओं को हमारे ही देश में बार बार अपमानित क्यों किया जाता है।

मुसलमानों के लिए की ये तल्ख़ टिप्पणी

एक सवाल पर शंकराचार्य ने कहा ये बताइए मुसलमान का हिंदू धर्म में क्या योगदान है? उन्होंने कहा मुसलमान का तो भारत देश में भी कोई योगदान नहीं है, क्योंकि उन्होंने भारत से अलग होकर अपना देश बना लिया, उन्होंने कहा सच बात तो ये है कि मुसलमान को राजनीति में भी दोयम दर्जा दिया जान चाहिए लेकिन नहीं देते अब आप चाहते हो हम धर्म में दे, तो क्यों उन्हें शामिल करें ?

वक्फ़ बोर्ड में हिंदू अधिकारी की नियुक्ति पर सरकार को घेरा

वक्फ़ बोर्ड से जुड़े सवाल पर सरकारी अधिकारी के शामिल होने की फैसले पर सवाल उठाते हुए शंकराचार्य ने कहा उससे हमको क्या फायदा? सरकारी अधिकारी तो वैसे ही हिंदू धर्म के खिलाफ है, उन्होंने कहा हम गाय पकड़ते है थाने में ले जाते हैं कोई हमारी मदद नहीं करता उल्टा हमारे ऊपर ही मुकदमा लादता है।

सुप्रीम कोर्ट सहित अन्य कोर्ट के लिए कही ये बात

शंकराचार्य ने कोर्ट पर भी तल्ख़ टिप्पणी की, उन्होंने कहा हम जब भी मंदिर की बात करें या हिन्दू धर्म से जुडी कोई बात करें तो अधिकारी हमारे खिलाफ खड़े हो जाते हैं सुप्रीम कोर्ट हो या कोई दूसरी कोर्ट, उसे हिंदू धर्म के खिलाफ फैसला सुनाने में गर्व महसूस होता है, तो हमरी तो कोई सुनने वाला नहीं है तो वक्फ़ बोर्ड में हंदू नाम जैसा अधिकारी होगा तो उससे हिन्दुओं का क्या भला होगा ये सिर्फ बरगलाने की बात है।

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