Pahalgam Attack: असम विश्वविद्यालय के प्रोफेसर देबाशीष भट्टाचार्य ने कलमा पढ़कर बचाई जान

Pahalgam Attack: असम विश्वविद्यालय के प्रोफेसर देबाशीष भट्टाचार्य ने कलमा पढ़कर बचाई जान

कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 28 लोगों की जान चली गई। बताया जा रहा है कि आतंकियों ने हमले के दौरान लोगों से कलमा पढ़ने को कहा, और जो लोग नहीं पढ़ पाए, उन्हें गोली मार दी गई। इस हमले में असम विश्वविद्यालय के प्रोफेसर देबाशीष भट्टाचार्य की जान मुश्किल से बच पाई। जब आतंकी गोली चला रहे थे तब उन्होंने तुरंत कलमा पढ़ना शुरू कर दिया, जिससे उनकी जान बच गई। पर क्या आप जानते हैं कि कलमा क्या होता है और इसका मतलब क्या है और इसका महत्व क्या है?

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क्या होता है कलमा?

रिपोर्ट के मुताबिक, इस्लाम धर्म में कलमा को बहुत ही अहम माना जाता है। करीब 1450 साल पहले इस्लाम के आखिरी पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब ने इस्लाम के पांच बुनियादी स्तंभ बताए हैं जिसमें कलमा, नमाज, रोजा, जकात और हज शामिल है। इनमें कलमा इस्लाम का पहला और सबसे जरूरी सिद्धांत है।

कलमा का मतलब इस बात की गवाही कि अल्लाह एक है और हजरत मोहम्मद साहब उसके पैगंबर हैं। इसे पढ़ना इस्लाम को अपनाने का पहला कदम माना जाता है। माना जाता है कि कोई भी व्यक्ति अगर दिल से एक बार कलमा पढ़ ले तो वह मुसलमान बन जाता है।

इस्लाम में जबरदस्ती किसी से कलमा पढ़वाना गुनाह

इस्लाम धर्म में दाखिल होने के लिए पहला कलमा तय्यब पढ़ना जरूरी होता है। इस कलमे में "ला इलाहा इल्लल्लाह, मुहम्मदुर रसूलुल्लाह" पढ़ा जाता है जिसका मतलब होता है अल्लाह के अलावा कोई दूसरा भगवान नहीं है। दुनियाभर के सुन्नी और शिया मुसलमान यह कलमा पढ़ते हैं, और यह एक सामान्य धार्मिक परंपरा है। हालांकि, इस्लाम में जबरदस्ती किसी से कलमा पढ़वाना गुनाह माना जाता है, क्योंकि यह विश्वास और आस्था का मामला है।

पहले भी कलमा को लेकर हो चुका है विवाद

यह कोई पहली बार नहीं है जब कलमा चर्चा में आया हो। इससे पहले भी कई मौकों पर कलमा को लेकर विवाद या चर्चा हुई है। दुनिया के कई इस्लामिक देशों ने अपने राष्ट्रीय झंडे में भी कलमे को जगह दी है जैसे इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ अफगानिस्तान और सऊदी अरब।

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