देश के कई राज्यों में तापमान काफी बढ़ गया है और दोपहर के समय धूप इतनी तेज हो गई है कि खड़ा रहना भी मुश्किल हो जाता है। इस बढ़ते तापमान का प्रभाव मनुष्यों पर ही नहीं फसलों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। कई जगह पर गेहूं व जौ की खड़ी फसल पर इस बढ़ते तापमान के कारण समस्या हो रही है। हालांकि गेहूं की कटाई का काम कई जगहों पर शुरू हो गया है, तो कई जगह पर चल रहा है। वहीं कुछ किसानों ने देरी से बुवाई की है वे अब कटाई का काम शुरू करेंगे। ऐसे में बढ़ता तापमान गेहूं व जौ की खड़ी फसलों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। इस मौसम में किसानों को गेहूं व जौ की फसलों की इस बढ़े हुए तापमान से सुरक्षा करना बेहद जरूरी हो जाता है। बढ़ते तापमान को देखते हुए कृषि जानकारों व विशेषज्ञाें ने इस फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई है और इसकी सुरक्षा के उपाय भी बताए हैं।
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बढ़ते हुए तापमान से गेहूं को नुकसान
कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक यदि तापमान समान्य से अधिक बढ़ता है तो देरी से बोई गई गेहूं की फसल पर विपरित प्रभाव पड़ सकता है। गेहूं के परागण के समय अधिकतम तापमान 30 सेंट्रीग्रेड से अधिक नहीं होना चाहिए। यदि तापमान 35 डिग्री से ऊपर हो जाता है तो फसल पर नुकसान की संभावना अधिक हो जाती है। लेकिन कई जगहों पर तापमान अभी से ही 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास चल रहा है जो गेहूं की फसल के लिए सही नहीं है। इससे गेहूं की फसल को नुकसान हो सकता है। अधिक तापमान के कारण गेहूं की क्ववालिटी खराब हो सकती है जिससे किसानों को नुकसान हो सकता है। क्योंकि खराब या हल्की क्वालिटी वाले गेहूं के भाव कम मिलते हैं।
अधिक तापमान से क्या हो सकता है नुकसान
अधिक तापमान के प्रभाव से गेहूं की फसल पर विपरित प्रभाव पड़ सकता है। बढ़े तापमान से मिट्टी में नमी कम हो जाती है जिससे सिंचाई की आवश्यकता अधिक होती है। अधिक तापमान से गेहूं की फसल को जो नुकसान हो सकते हैं, वे इस प्रकार से हैं–
गेहूं की फसल को कैसे प्रभावित करता है अधिक तापमान
अधिक तापमान से गेहूं व जौ की फसल को खतरा हो सकता है। गर्मी के कारण फसलों में पराग और पुंकेसर निष्क्रिय हो जाते हैं। इससे परागण प्रभावित होता है और भ्रूण का विकास रुक जाता है। भ्रूण का विकास अवरूद्ध होने से दानों की संख्या में कमी आ जाती है। दानों का आकार प्रभावित होता है और उनका वजन कम हो जाता है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार अधिक तापमान के प्रभाव को कम करने के लिए किसान कुछ उपाय कर सकते हैं। इनमें से कुछ उपाय इस प्रकार से हैं–
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