तमिलनाडु की सियासत में आया बड़ा भूचाल,चुनाव से पहले सेंथिल बालाजी और पोनमुडी ने छोड़ी स्टालिन कैबिनेट

तमिलनाडु की सियासत में आया बड़ा भूचाल,चुनाव से पहले सेंथिल बालाजी और पोनमुडी ने छोड़ी स्टालिन कैबिनेट

नई दिल्ली: तमिलनाडु में बिजली मंत्री सेंथिल बालाजी और वन मंत्री के. पोनमुडी ने रविवार को नाटकीय अंदाज में अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। दोनों मंत्रियों ने राज्यपाल आर.एन. रवि को अपना इस्तीफा सौंप दिया, जिसके तुरंत बाद मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने अपने मंत्रिमंडल में फेरबदल कर नए मंत्रियों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर दी।

बता दें कि सेंथिल बालाजी लंबे समय से प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच के घेरे में थे। उन पर पूर्व एआईएडीएमके सरकार में परिवहन मंत्री रहते हुए ‘कैश फॉर जॉब’ घोटाले को अंजाम देने का आरोप है। बालाजी को हाल ही में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली थी, जिसके बाद वे जेल से बाहर आ गए थे। हालांकि, जेल से रिहा होने के तुरंत बाद बालाजी के फिर से मंत्री पद पर आसीन होने पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की थी।

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वहीं, वन मंत्री पोनमुडी भी हाल के दिनों में विवादों से घिरे रहे हैं। एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान उनकी कुछ टिप्पणियों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी थी। पोनमुडी ने शैव और वैष्णव परंपराओं के साथ-साथ महिलाओं पर भी आपत्तिजनक टिप्पणी की थी, जिस पर विपक्षी दलों एआईएडीएमके और भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी।

मद्रास हाई कोर्ट ने लिया संज्ञान

उन्होंने मुख्यमंत्री स्टालिन से पोनमुडी को मंत्रिमंडल से तत्काल बर्खास्त करने की मांग की थी। हालांकि बाद में पोनमुडी ने अपने विवादास्पद बयान के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगी, लेकिन मामला शांत नहीं हुआ। मद्रास उच्च न्यायालय ने भी मामले का स्वत: संज्ञान लेते हुए मंत्री को फटकार लगाई और पुलिस को एफआईआर दर्ज कर मामले की निष्पक्ष जांच करने का आदेश दिया।

क्यों मंत्रियों ने दिया इस्तीफा?

इन इस्तीफों पर राजनीतिक विश्लेषकों का मानना ​​है कि इन दोनों मंत्रियों का इस्तीफा मुख्यमंत्री स्टालिन के दबाव के कारण हुआ, जो अपनी सरकार की छवि को बचाने के लिए किसी भी तरह के विवाद से दूरी बनाए रखना चाहते हैं।

स्टालिन पहले भी कह चुके हैं कि उनकी सरकार “भ्रष्टाचार और अपमानजनक आचरण” के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाएगी। रविवार शाम मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी बयान में कहा गया, “राज्य के हित और सरकार की छवि को बनाए रखने के लिए मंत्रिमंडल में फेरबदल किया गया है। मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन जल्द ही नए मंत्रियों की नियुक्ति की सिफारिश करेंगे।”

मंत्रिमंडल में होगा बदलाव

सूत्रों के अनुसार, इस्तीफा देने वाले मंत्रियों की जगह मंत्रिमंडल में नए चेहरे शामिल किए जाएंगे, ताकि सरकार की कार्यकुशलता और जनता का विश्वास मजबूत हो। यह भी उम्मीद है कि आने वाले दिनों में मंत्रिमंडल में कुछ और बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

DMK पर हमलावर हुआ विपक्ष

इस पूरे घटनाक्रम के बाद राज्य की राजनीति में हलचल मच गई है। भाजपा और अन्नाद्रमुक समेत विपक्ष ने सरकार पर हमला तेज कर दिया है, जबकि सत्तारूढ़ द्रमुक ने इन इस्तीफों को “नैतिकता और पारदर्शिता” का उदाहरण बताकर बचाव किया है।

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