भारत और पाकिस्तान के बीच हाल ही में तनाव कम होने का श्रेय लेने वाले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अब अपने ही बयान से पलट गए हैं। 10 मई को उन्होंने गर्व से कहा था कि उनकी मध्यस्थता के बाद दोनों देशों ने युद्धविराम पर सहमति जताई है, लेकिन अब वे कह रहे हैं कि उन्होंने कोई सीजफायर नहीं कराया, बस मदद की।
उनका दावा है कि उन्होंने सिर्फ बातचीत कराई और मामला खुद ही सुलझ गया। ट्रम्प के इस यू-टर्न ने कूटनीतिक हलकों में खूब चर्चा बढ़ा दी है और सवाल उठ रहे हैं कि क्या ये सचमुच एक सुलझा हुआ मामला था या सिर्फ एक और बयानबाजी।
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ट्रम्प का यह दावा कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान को व्यापार करने की सलाह दी और युद्ध से रोका, काफी चौंकाने वाला है। उन्होंने कह डाला था कि दोनों देश 1000 वर्षों से लड़ते आ रहे हैं और उन्होंने बीच में आकर समझौता करा दिया। उनका यह भी कहना था कि अगर मामला न सुलझता तो स्थिति पूरी तरह नियंत्रण से बाहर हो सकती थी। लेकिन साथ ही उन्होंने इस पर भी संदेह जताया कि क्या वास्तव में यह मसला पूरी तरह सुलझा है या फिर नहीं।
बयान से यू-टर्न पर क्या कूटनीतिक मायने हैं
अमेरिका के राष्ट्रपति ने 10 मई को दावा किया था कि उनकी मध्यस्थता से भारत और पाकिस्तान ने तत्काल युद्धविराम पर सहमति जताई है। उन्होंने इसे अमेरिका की बड़ी कूटनीतिक सफलता बताया था और दोनों देशों को समझदारी दिखाने के लिए बधाई भी दी थी। लेकिन 15 मई को दिए एक नए बयान में उन्होंने यह कहकर सबको चौंका दिया कि उन्होंने कोई सीजफायर नहीं कराया, बल्कि सिर्फ मदद की। इस पलटाव ने उनके पुराने दावे पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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बयान से बदलने के पीछे की वजह
उनके इस बयान से पलटने के पीछे बजह भारत का कड़ा रूख माना जा रहा है। ट्रंप के कतर में दिए हालिया बयान में कहा कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान दोनों से बात की, व्यापार को प्राथमिकता देने की सलाह दी और इस प्रयास से तनाव कम हुआ। उनका कहना था कि मामला बहुत खराब दिशा में जा रहा था लेकिन उन्होंने सुलझाने की कोशिश की और अब स्थिति बेहतर है। ट्रम्प ने दावा किया कि पाकिस्तान और भारत दोनों खुश हैं और सही रास्ते पर चल रहे हैं। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि वह पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं कि मामला पूरी तरह खत्म हो चुका है।
