रायगढ़ : साराडीह बैराज भूअर्जन के पूर्व जशपुर गांव में हुई जमीनों की खरीद-बिक्री पर कुछ अफसरों की नजरें पड़ी थी। जांच के आदेश भी हुए। लेकिन कार्रवाई नहीं हुई क्योंकि आपसी सांठगांठ से मामले को दबाया गया। हैरानी की बात यह है कि तब सारंगढ़ तहसीलदार शशिकांत कुर्रे ही थे।साराडीह बैराज के डुबान क्षेत्र में किसानों की जमीन खरीदने के लिए दो कंपनियां सक्रिय रही। इस बार फिर से हुई शिकायत से मामला एक बार फिर जिंदा हुआ है। साराडीह बैराज के डूब क्षेत्र में जाने वाली जमीनों को रेत लीज के नाम पर औने-पौने दामों में खरीदा गया था। नौ गांवों जशपुर, छतौना, नावापारा, तिलाईमुड़ा, जसरा, दहिदा, बरभांठा, धूता, घोटला छोटे के 1034 किसानों से 432.150 हे. भूमि का अधिग्रहण किया गया।
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अजय अग्रवाल पिता मुनुलाल और अरुण अग्रवाल निवासी रायपुर भी प्रभावितों में शामिल हैं। भूअर्जन से एक-दो साल पहले ही विमल एग्रीकल्चर डायरेक्टर विमल अग्रवाल निवासी रायपुर ने 10.758 हे. और मदनपुर साउथ कोल कंपनी डायरेक्टर आलोक चौधरी ने जशपुर की 126 हे. जमीन खरीद ली। अभी इस भूमि की क्या स्थिति है। इसकी जांच के आदेश दिए गए थे। तब सारंगढ़ में तहसीलदार शशिकांत कुर्रे को रिकॉर्ड प्रस्तुत करने को भी कहा गया था। इसके बाद मामला दब गया।
पुलिस में शिकायत के बाद भी जांच नहीं
पूरी जमीन कृषि भूमि के रूप में एक व्यावसायिक संस्थान ने खरीदी। मदनपुर कोल कंपनी ने 136 टुकड़ों में 126 हे. जमीन खरीदी थी। उप पंजीयक से सेटिंग करके रजिस्ट्री करवाई गई। 4 जनवरी 2017 को कोसीर थाने में भी शिकायत दर्ज की गई थी। 15 जनवरी 2017 को एसपी के निर्देश पर जांच भी शुरू हुई। अभी तक न तो पटवारी और न ही तत्कालीन तहसीलदार पर कोई एक्शन लिया गया।
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