रायगढ़ : राशन दुकानों में खाद्यान्न गबन करने वालों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई जारी है। भरपाई नहीं करने की स्थिति में एफआईआर दर्ज करवाई जा रही है। वसूली के लिए पूरा अधिकार एसडीएम और तहसीलदार को होता है। पुसौर, तमनार और खरसिया में तीन साल पुराने प्रकरणों में भी वसूली नहीं हो सकी है। पीडीएस सिस्टम में एक ही चावल दो बार जमा होता है। दुकानों से चावल गायब कर उसे मिलर्स को बेच दिया जाता है। फिर वही चावल गोदामों में जमा हो जाता है। दुकानों में जब जांच होती है तो पता चलता है कि हितग्राहियों को तो चावल मिला ही नहीं। भारी मात्रा में चावल गबन करने वाले दुकान संचालकों के विरुद्ध पहले वसूली की कार्रवाई होती है। एसडीएम को आरआरसी जारी करने कहा जाता है। इसके बाद भी वसूली नहीं हो पाती तो एफआईआर दर्ज की जाती है।
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रायगढ़ जिले में पुसौर, तमनार और खरसिया तहसील फिसड्डी हैं। सितंबर 2022 में जिन दुकानों में खाद्यान्न की कमी पाई गई थी, उनसे वसूली होनी थी। पुसौर में एक दुकान से 232 क्विं. चावल, 4 क्विं. नमक, 14.53 क्विं. शक्कर की वसूली होनी है। आरआरसी जारी होने के बावजूद तहसीलदार ने कार्रवाई नहीं की। वहीं खरसिया में भी एक दुकान से 532 क्विं. चावल, 16.69 क्विं. चना, 18 क्विं. नमक और 17.21 क्विं. शक्कर की वसूली की जानी है। जबकि तमनार में 6 दुकानों से 91.17 क्विं. चना, 93.44 क्विं. नमक और 47.82 क्विं. शक्कर वसूली होनी है। आरआरसी जारी होने के बाद अचल संपत्ति कुर्क कर राशि की वसूली की जाती है लेकिन तहसीलदार इस ओर ध्यान नहीं देते।
इससे पहले भौतिक सत्यापन को गंभीरता से नहीं लिया जाता था। पिछले दो सालों से राशन दुकानों में खाद्यान्न गबन के ज्यादा मामले आने लगे तो भौतिक सत्यापन और कार्रवाई में सख्ती होने लगी। इसके बावजूद पीडीएस सिस्टम में दीमक की तरह माफिया घुस गए हैं। पीडीएस चावल खरीदने का काम केवल राइस मिलर्स करते हैं। उन पर जब तक कार्रवाई नहीं होगी, तब तक यह खेल चलता रहेगा।
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