धान की बुवाई का सीजन शुरू हो चुका है. कुछ दिन बाद किसान अपने खेतों में धान की बुवाई शुरू कर देंगे. खेत की बुवाई करने से पहले मिट्टी को सही तरह से तैयार होना बेहद आवश्यक है. धान की रोपाई से पहले बीज का सही उपचार से लेकर मिट्टी को सही तरह से तैयार करना, पैदावार को बढ़ता है. मिट्टी को तैयार करने के लिए आजकल किसान रासायनिक खादों से हटकर प्राकृतिक तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं. इसके लिए सबसे अधिक वर्मी कंपोस्ट का उपयोग किया जा रहा है. इससे खेत में न सिर्फ मिट्टी की उर्वरक क्षमता बढ़ती है, बल्कि फसल की गुणवत्ता और उत्पादकता दोनों में जबरदस्त सुधार होता है.
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इसका करें इस्तेमाल
वर्मी कंपोस्ट एक नेचुरल खाद है, जिसे घर पर आसानी से बनाया जा सकता है, यह गोबर और केंचुओं की मदद से तैयार की जाती है. यह खाद मिट्टी को पोषण देने के साथ-साथ उसकी उर्वरक क्षमता को सुधारने में भी मदद करती है. धान की खेती में वर्मी कंपोस्ट का उपयोग करने से कई फायदे होते हैं. कृषि एक्सपर्ट्स बताते हैं कि वर्मी कंपोस्ट में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटैशियम और दूसरे सूक्ष्म पोषक तत्व होते हैं, जो पौधों की ग्रोथ के लिए जरूरी हैं. ये खाद मिट्टी को पोरस बनाती है, जिससे पानी ज्यादा देर तक रुकता है और सूखे की स्थिति में भी फसल को नुकसान नहीं होता है. रासायनिक फर्टिलाइजर की जगह पर नेचुरल ऑर्गेनिक तरीके से तैयार हुआ वर्मी कंपोस्ट बेहद उपयोगी है. इससे लागत घटती है और पर्यावरण भी सुरक्षित रहता है.
इसकी जांच जरूरी
धान की अच्छी पैदावार के लिए सबसे पहले मिट्टी की जांच कराना जरूरी है. इससे पता चलता है कि मिट्टी में कौन-कौन से पोषक तत्वों की कमी है और मिट्टी के लिए कौन सी और कितनी खाद की आवश्यकता है. सही मात्रा में खाद डालने से फर्टिलाइजर की बचत होती है और मिट्टी में पोषक तत्वों का संतुलन बनाकर उत्पादन को बढ़ाया जा सकता है. बिना जांच के ज्यादा खाद डालने से मिट्टी खराब हो सकती है, जिससे खेतों की पैदावार भी घटती है. मिट्टी की जांच के बाद जरूरत के अनुसार इस्तेमाल किए गए खाद से पैदावार अधिक होती है और लागत भी कम आती है.
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