इस्लामाबाद : पाकिस्तान पिछले कुछ दिनों से अमेरिका के गुणगान करता नहीं थक रहा था। पाक आर्मी चीफ असीम मुनीर ने व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ लंच किया। ट्रंप को खुश करने के लिए मुनीर ने उन्हें नोबल शांति पुरस्कार देने की गुहार लगाई। बीते दिन पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी इसका समर्थन किया। इस दोस्ती को कुछ घंटे ही बीते थे कि पाकिस्तान ने एक बार फिर अपने तेवर बदल दिए।पाकिस्तान ने ईरान पर अमेरिका के हमले की कड़ी निंदी की है। पाकिस्तान ने अपने बयान से साफ कर दिया है कि वो ईरान का ही साथ देगा।
पाकिस्तान ने क्या कहा?
अमेरिका ने ईरान के तीन परमाणु ठिकानों को तबाह कर दिया। इस पर पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी किया है। पाकिस्तान ने दो टूक शब्दों में कहा-
इससे क्षेत्र में तनाव और अधिक बढ़ सकता है, जिससे हम बेहद चिंतित महसूस कर रहे हैं।
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ईरान को रक्षा का अधिकार: पाकिस्तान
बता दें कि पाकिस्तान और ईरान 900 किलोमीटर की सीमा साझा करते हैं। पाकिस्तान ने कहा, "अमेरिका ने इस हमले से अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन किया है। संयुक्त राष्ट्र के चार्टर के अनुसार ईरान को अपनी रक्षा करने का पूरा अधिकार है।"
पाकिस्तान को सता रही चिंता
पाक विदेश मंत्रालय के अनुसार, ईरान के खिलाफ की जा रही कार्रवाई हिंसा और चिंता को जन्म दे रही है। इससे हम बेहद परेशान हैं। अगर यह तनाव और बढ़ा तो इसके नुकसानदायक परिणाम पूरे क्षेत्र में देखने को मिल सकते हैं।
बातचीत का दिया सुझाव
पाकिस्तान ने ईरान, इजरायल और अमेरिका को बातचीत से मसले का हल निकालने का सुझाव दिया है। पाक विदेश मंत्रालय ने कहा, "बातचीत और कूटनीति की मदद से इस तनाव का हल निकालने पर जोर दिया जाना चाहिए।"
ट्रंप को नोबल पुरस्कार देने की लगाई थी गुहार
बता दें कि शनिवार को पाकिस्तान सरकार ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम नोबल शांति पुरस्कार के लिए नॉमिनेट करने की अपील की थी। पाक सरकार का यह बयान ठीक असीम मुनीर के अमेरिका दौरे के तीन दिन बाद सामने आया था।
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