गरियाबंद : गरियाबंद जिले का एकमात्र जीवनदायिनी "सिकासार बांध" पूरी तरह से सुख चुका है। बारिश का मौसम भी आ गया है, लेकिन बांध में जलसंकट गहराया हुआ है। छत्तीसगढ़ में मानसून की एंट्री हो गई है, प्रदेश के कई अलग–अलग जगहों में जमकर बारिश हो रही है, नदी–नाले उफान पर आ गए हैं। वहीं बात की जाए गरियाबंद जिले की तो यहां भी बारिश हो रही है, लेकिन गरियाबंद का "सिकासार बांध", जो कि एकमात्र जीवनदायिनी है, वह जलसंकट से जूझ रहा है।
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मालूम हो कि सिकासार बांध में हमेशा जलभराव बना रहता था। लेकिन इस बार रबी फसल के लिए पानी की मांग पर बांध से पानी छोड़े गए इसके अलावा राजिम कुंभ के लिए पानी छोड़ा गया था। मिली जानकारी के मुताबिक वर्तमान स्थिति में बांध में 19 प्रतिशत पानी है। लेकिन बांध की जो तस्वीर सामने आई है, वह काफी चिंतनीय है। कभी यह बांध पानी से लबालब हुआ करता था, गेट के सामने रुके हुए पानी का विहंगम दृश्य देखते ही बनता था। बांध में आज पत्थर ही पत्थर दिखाई दे रहे हैं, जिसमें पर्यटक सेल्फी के साथ फोटो खिंचवाते नजर आते हैं। अब बांध को भी इस मानसून में अच्छी बारिश का बेसब्री से इंतजार है।
सिंचाई विभाग के एसडीओ मनोज टांडी ने बताया कि सिकासार बांध में 19 प्रतिशत पानी है। रबी फसल के साथ ही निस्तारी के लिए पानी छोड़ा गया था। इसके अलावा बांध से राजिम कुंभ और धमतरी जिले में सिंचाई के लिए भी पानी छोड़े गए थे।
खूबसूरत वासियों के बीच बसा है "सिकासार बांध" इसलिए है खास–
उल्लेखनीय है कि प्राकृतिक वादियों की खूबसूरती के बीच "सिकासार बांध" स्थित है। जो कि गरियाबंद जिला मुख्यालय से लगभग 50 किमी की दूरी पर है। बता दें कि सिकासार जलाशय का निर्माण सन 1977 में हुआ, इसकी लंबाई 1540 मी. एवं ऊंचाई 9.32 मी. है। यहां जल विद्युत संयंत्र स्थापित है, जिससे सिंचाई के साथ–साथ बिजली उत्पादन भी किया जाता है।
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