विंडहोकः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी...नामीबिया और चीता में क्या कुछ खास रिश्ता है, जिससे ये सभी एक दूसरे के पूरक बने हुए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को नामीबिया का दौरा संपन्न कर जब भारत रवाना हुए तो एक बार फिर इन रिश्तों की ताजगी हर किसी को महसूस होने लगी। पीएम मोदी ने नामीबिया की धरती से भारत के लिए उड़ान भरते समय चीतों को याद किया और इस अफ्रीकी देश का आभार भी जताया...तो आइये जानते हैं कि पीएम मोदी...नामीबिया और चीता की असली कहानी क्या है?
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पीएम मोदी...नामीबिया और चीतों को कैसे जुड़ा रिश्ता?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी...नामीबिया और चीतों की कहानी एक अनूठी और ऐतिहासिक परियोजना से जुड़ी है, जिसका मकसद भारत में विलुप्त हो चुके चीतों की वापसी करना है। इस कड़ी में भारत में पहली बार नामीबिया से 17 सितंबर 2022 को 8 चीते लाए गए। यह तारीख इसलिए भी खास है कि इसी दिन पीएम नरेंद्र मोदी का 72वां जन्मदिन था। पीएम मोदी के जन्मदिन पर नामीबिया से 8 चीते मध्य प्रदेश के कुनो नेशनल पार्क पहुंचे। इन्हें बोइंग 747 से विंडहोक से उड़ाकर जयपुर और बाद में ग्वालियर लेकर आया गया... और फिर हेलीकॉप्टर से कुनो पार्क तक पहुंचाया गया था। पीएम मोदी के इस ऐतिहासिक कदम ने “प्रोजेक्ट चीता” नामक बहु-महाद्वीपीय पुनर्स्थापन योजना की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य भारत में लगभग 70 वर्षों से अतीत में विलुप्त इस खूंखार प्रजाति को वापस लाना था ।
भारत में विलुप्त क्यों हुआ चीता?
एशियाई चीता कभी भारत के जंगलों में बड़ी संख्या में पाए जाते थे। मगर शिकार और आवास की कमी के कारण ये 1952 में भारत से आधिकारिक रूप से चीतों को विलुप्त घोषित कर दिया गया। मगर 70 साल बाद पीएम मोदी ने चीतों को दोबारा भारत में बसाने की ठान ली...और इसमें नामीबिया ने मदद की। यह दुनिया में पहला ऐसा मामला था जब, किसी देश में “वन्यजीव को पुनर्स्थापित” करने की योजना बनाई गई।
नामीबिया और भारत के बीच समझौता
पीएम मोदी की खास पहल पर वर्ष 2022 में भारत सरकार ने नामीबिया के साथ एक एमओयू साइन किया। इसके तहत नामीबिया से 8 अफ्रीकी चीते भारत लाए गए। इसमें 5 नर और 3 मादा थे। इन चीतों को 17 सितंबर 2022 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के मौके पर मध्य प्रदेश के 'कूनो राष्ट्रीय उद्यान' में छोड़ा गया। पीएम मोदी ने खुद चीतों को छोड़ा और इसे "प्रकृति प्रेम और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ऐतिहासिक कदम" बताया।
पीएम मोदी ने क्यों बसाए चीते?
भारत की धरती 1952 के बाद से चीता विहीन हो चुकी थी। ऐसे में देश की जैव विविधता को पुनः समृद्ध करने, पारिस्थितिकी तंत्र में शिकारी-शिकार संतुलन बनाए रखने, पर्यावरणीय पर्यटन को बढ़ावा देने, विलुप्त प्रजातियों के पुनर्स्थापन की वैश्विक मिसाल बनाने के लिए चीतों को फिर भारत में बसाना जरूरी था। इसलिए पीएम मोदी ने यह बड़ा कदम उठाया।
इस प्रोजेक्ट में क्या हैं चुनौतियां?
अफ्रीकी चीता और भारतीय पारिस्थितिकी तंत्र में अंतर होने के कारण कई चुनौतियां हैं। इससे चीतों के अनुकूलन में कठिनाइयां हैं, शिकार की उपलब्धता और मानव-वन्यजीव संघर्ष भी एक बड़ी चुनौती है। नामीबिया से लाए गए कुछ चीतों की मौत ने और भी चुनौतियां पैदा कर दीं। हालांकि अब भारत ने दक्षिण अफ्रीका से भी चीतों को लाने की योजना बनाई है। इसका टारगेट भारत में एक स्थायी और स्वस्थ चीता आबादी बसाना है।
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पीएम मोदी ने चीतों के लिए नामीबिया को कहा शुक्रिया
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत में चीतों को लाकर बसाने में सहयोग के लिए बुधवार को नामीबिया के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने इसे दोनों देशों के बीच "सहयोग, संरक्षण और करुणा की एक सशक्त कहानी" बताया। नामीबिया की संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए मोदी ने मध्य प्रदेश के कुनो राष्ट्रीय उद्यान में व्यक्तिगत रूप से चीतों को छोड़ने का स्मरण किया। उन्होंने कहा, "भारत और नामीबिया के बीच सहयोग, संरक्षण और करुणा की एक सशक्त कहानी है, जब आपने हमारे देश में चीतों को फिर से बसाने में हमारी मदद की थी। हम आपके इस उपहार के लिए अत्यंत आभारी हैं।" मोदी ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि चीतों ने "आपके लिए संदेश भेजा है: सब कुछ ठीक है।" प्रधानमंत्री ने कहा, "वे (चीते) खुश हैं और अपने नए परिवेश में अच्छी तरह ढल गए हैं। उनकी संख्या भी बढ़ी है। जाहिर है, वे भारत में आनंद से रह रहे हैं।