कुनकुरी न्यायालय ने सुनाया फैसला, महादेव सट्टा ऐप मामले में पिता-पुत्र सहित चार आरोपीयों को 03-03 साल का कठोर कारावास की सजा एवं 05-05 हजार का जुर्माना

कुनकुरी न्यायालय ने सुनाया फैसला, महादेव सट्टा ऐप मामले में पिता-पुत्र सहित चार आरोपीयों को 03-03 साल का कठोर कारावास की सजा एवं 05-05 हजार का जुर्माना

जशपुर : कुनकुरी जशपुर जिले में महादेव सट्टा एप से जुड़े ₹26.76 करोड़ की सनसनीखेज साइबर ठगी का खुलासा हुआ है। कुनकुरी न्यायालय में इस प्रकरण की सुनवाई न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी श्री नरेंद्र कुमार तेंदुलकर की अदालत में हुई, जिसमें पिता-पुत्र की ताम्रकार तिकड़ी और उनके एक सहयोगी को भारतीय दंड संहिता की धारा 420 सहपठित धारा 34 के तहत दोषी करार दिया गया। अभियोजन की ओर से शासन का प्रतिनिधित्व एडीपीओ श्री संजय विश्वकर्मा ने किया और मामले की गंभीरता को न्यायालय के समक्ष प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।

ये भी पढ़े : मुखिया के मुखारी - हम आपके हैं कौन बनते

पूरा मामला तब सामने आया जब तपकरा थाना क्षेत्र के निवासी विकास लकड़ा ने 16 जुलाई 2024 को रिपोर्ट दर्ज कराई कि मनोज ताम्रकार और उनके पुत्र सुकेश व चंद्रसेन ताम्रकार नौकरी दिलाने के नाम पर उनसे ₹5000 नगद, आधार व पैन कार्ड लिए और उनके नाम से बैंक खाता खुलवाया गया। जांच के दौरान यह सामने आया कि इन आरोपियों ने कई अन्य ग्रामीणों से भी इसी तरह दस्तावेज़ लेकर उनके नाम से फर्जी बैंक खाते खुलवाए, जिन्हें बाद में महादेव सट्टा एप से जुड़े ऑनलाइन सट्टेबाजी गिरोह को सौंपा गया। इन खातों के जरिए ₹26.76 करोड़ का अवैध लेनदेन किया गया।

कोर्ट ने पाया कि आरोपीगण ने एक संगठित साइबर गिरोह के रूप में कार्य करते हुए भोले-भाले ग्रामीणों का भरोसा तोड़ा और उनके बैंक खातों व डिजिटल पहचान का दुरुपयोग किया। इस मामले में आरोपियों – चंद्रसेन ताम्रकार (26), सुकेश ताम्रकार (25), मनोज ताम्रकार (58), और योगेश साहू (23) – को तीन-तीन वर्ष की कठोर कारावास और ₹5000-₹5000 जुर्माने की सजा सुनाई गई। अर्थदंड न अदा करने की स्थिति में एक-एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतने का आदेश भी दिया गया।

ये भी पढ़े : चिरमिरी में स्ट्रीट लाइट समस्या: आखिर कब होगा समाधान?

न्यायालय ने यह टिप्पणी भी की कि यह अपराध केवल आर्थिक धोखाधड़ी नहीं, बल्कि समाज के भरोसे और डिजिटल प्रणाली पर हमला है। अतः यह अपराध आपराधिक परिवीक्षा के योग्य नहीं है। इस मामले में जप्त किए गए 124 एटीएम कार्ड, 125 चेकबुक, पासपोर्ट, बैंक सील, मोबाइल फोन और कुल 2.30 लाख रुपये नगद भी अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए गए।

इस सजा के माध्यम से न्यायालय ने साइबर अपराधियों के लिए एक स्पष्ट संदेश दिया है कि डिजिटल धोखाधड़ी को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।










You can share this post!


Click the button below to join us / हमसे जुड़ने के लिए नीचें दिए लिंक को क्लीक करे


Related News



Comments

  • No Comments...

Leave Comments