बालाघाट: यहां एक किसान ने विलुप्त होती देसी धान की 172 किस्म का रोपा तैयार किया है. इनमें खुशबूदार धान की किस्मों से लेकर बंपर पैदावार देने वाली देसी धान भी शामिल है. जिसे किसान रासायनिक खादों की बजाए जैविक खाद उपयोग कर उपजाते हैं. ऐसा कर वे प्रकृति को भी संरक्षित कर रहे हैं.
सुगंध से क्षेत्र सराबोर
बालाघाट में कई प्रकार की धान की खेती की जाती है. सुगंधित धान की किस्में पूरे क्षेत्र को मीठी खुशबू से सराबोर कर देती हैं. ऐसा ही सुगंधित चिन्नौर धान देश और दुनिया भर में अपनी महक बिखेर रही है. हालांकि मौजूदा दौर में ऐसी देशी धान की किस्में विलुप्त हो रही है. इनकी जगह अब अधिकतर किसान हाइब्रिड धान की खेती कर रहे हैं.
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परम्परागत बीजों को संरक्षित कर रहे किसान
जिले का एक ऐसा किसान जिन्होंने न केवल देशी परम्परागत बीजों को संरक्षित किया है, बल्कि बीते एक दशक से देशी बीजों का उपयोग कर जैविक खेती कर रहे हैं. साथ में दूसरे किसानों को भी इसी तरह देशी बीजों के उपयोग के साथ जहरीली खेती की बजाय जैविक खेती के लिए प्रेरित कर रहे हैं.
धान की गजब स्वाद वाली किस्में
जिले के आदिवासी बाहुल्य परसवाड़ा क्षेत्र के छोटे से गांव लोटमारा निवासी राजकुमार चौधरी बीते एक दशक से देसी बीजों की खेती कर रहे हैं. राजकुमार न केवल खेत में देसी बीजों का उपयोग करते हैं, बल्कि उन्होंने इस लंबे अंतराल के दौरान रासायनिक खाद का एक दाना भी अपने खेत में नहीं डाला है. राजकुमार चौधरी बताते हैं कि "मैं पूरी तरह जैविक खेती करता हूं, जिससे शुद्ध और पौष्टिक अनाज प्राप्त होता है. देसी बीज बार-बार बाजारों से खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती है. देसी बीजों से किसान साल दर साल बीज स्वयं ही बना सकते हैं. इससे पैसे की बचत भी होती है."
देसी धान की 172 किस्में
इस साल कृषक राजकुमार ने 172 किस्मों के देसी धान बीजों के रोप तैयार किए हैं. धान रोपाई का कार्य भी शुरू कर दिया है. राजकुमार बताते हैं कि "इतनी किस्मों के धान लगाने के बाद पूरा ब्योरा याद रखना मुश्किल होता है, इसलिए मैं रजिस्टर में नोट करता हूं. ऐसे में हमारे पास 172 प्रकार के धान का ब्यौरा लिखित रूप में मौजूद है."
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राम लक्ष्मण धान से निकलते हैं 2 चावल
राजकुमार के पास देसी धान की विभिन्न प्रकार की क्वालिटी है, जिनमें मोटा, बारीक, कलरफुल और सुगंधित किस्में है. फिलहाल उनके पास सुगन्धित धान की 15 किस्में उपलब्ध हैं. इसके अलावा ब्लैक राइस की 5, रेड राइस की 4 और ब्राउन राइस की कई किस्में हैं. साथ ही उनके पास राम लक्ष्मण नामक अजूबा धान भी मौजूद है, जिसमें एक धान में 2 चावल निकलते हैं.
किसान राजकुमार ने बताया कि "हमसे सैकड़ों किसान देसी बीज लेकर परम्परागत खेती का रुख कर रहे हैं. जैविक खाद का उपयोग कर जहरीली खेती से बचते हुए स्वादिष्ट और पौष्टिक अनाज उगा रहे हैं. इस तरह की परंपरागत खेती से मिट्टी को भी निर्जीव होने से बचा सकते हैं."
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