कॉपीराइट केस : एआर रहमान ने सजा के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया

कॉपीराइट केस : एआर रहमान ने सजा के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया

संगीतकार एआर रहमान ने 'पोन्नियन सेलवन 2' के गाने 'वीरा राजा वीरा' पर कॉपीराइट को लेकर एकल पीठ के फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है। पद्मश्री अवॉर्ड से सम्मानित भारतीय शास्त्रीय गायक फैयाज वसीफुद्दीन ने 2023 में कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उनका कहना है कि एआर रहमान और उनकी प्रोडक्शन कंपनी ने उनके पिता नासिर फैयाजुद्दीन डागर और चाचा जहीरुद्दीन के 'शिव स्तुति' से कॉपी की थी, लेकिन क्रेडिट तक नहीं दिया। सिंगल बेंच ने फैसला सुनाते हुए डागर भाइयों को क्रेडिट देने और प्रतिभागियों पर दो करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था। इस फैसले के खिलाफ एआर रहमान ने दिल्ली हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की, जिस पर आज सुनवाई हुई।

बार एंड बेंच के मुताबिक, एआर रहमान की ओर से वकील साईकृष्ण राजगोपाल पेश हुए। उन्होंने कहा कि संगीत मूल होना चाहिए। शास्त्रीय संगीत में जब कोई रचना रची जाती है, तो उसमें क्या भाव होता है, संगीत भावों को व्यक्त करता है। क्या संदेश देना चाहते हैं, उसके आधार पर राग चुनें। उन्होंने कहा कि हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में रागों के व्याकरण के नियम बहुत कड़े होते हैं। संगीत के स्वरों को कैसे संयोजित किया जाए, इसके भी नियम होते हैं। किसी राग के अनुरूप होने के लिए स्पष्ट रेखाएं निर्धारित रहती हैं।

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उन्होंने कहा कि इस राग में कुछ विशेषताएं हैं, जो संगीत पुस्तकों में पाई जा सकती है। एक संगीत रचना को विभिन्न शैलियों में गाया जा सकता है। ध्रपद, ठुमरी, ये शैलियां हैं। उन्होंने कहा कि फिल्म ओटीटी पर रिलीज हुई थी। आप इस नतीजे पर पहुंच चुके हैं कि वे लेखक हैं, मैं उल्लंघन का दोषी हूं, मुझे 2 करोड़ रुपये देने पड़े हैं। इससे प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है।

कोर्ट ने पूछा- किस हद तक विश्लेषण करें

जस्टिस सी हरिशंकर और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की कोर्ट ने पूछा कि यह तय करना होगा कि अदालत किस हद तक विश्लेषण कर सकती है। 'इतना तू मुझसे प्यार बढ़ा' गाने में मोजार्ट सिम्फनी से समानता थी। मान लीजिए कि मोजार्ट जीवित होते तो कोर्ट रागों और स्वरों की बारीकियों में किस हद तक जा सकती थी। कोर्ट ने कहा कि मोजार्ट को एकाधिकार नहीं दिया जा सकता। आप उल्लंघन का फैसला किस कान से करते हैं? क्या यह एक आम श्रोता का कान है या एक प्रशिक्षित समझान कान। इस पर राजगोपाल ने कहा कि यह मूल नहीं है। हम राग अदाना का अनुसरण कर रहे हैं। जब तक कि वास्तव में मूल राग नहीं बजा रहे हैं, तथ्य केवल यह है कि शिव स्तुति राग का पालन करती है।

कोर्ट ने कहा कि नोटों का एक ही क्रम अलग-अलग ध्वनि देगा। मौलिकता के मामले में आपको थोड़ी दिक्कत हो सकती है। सिर्फ क्रम एक ही है, आप उल्लंघन पर कुछ नहीं कह सकते हैं। इस पर एडवोकेट राजगोपाल ने कहा कि आप जो निर्णय लेंगे, उसका देश में संगीत के भविष्य पर बहुत बड़ा असर होगा। कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 24 जुलाई की तारीख तय कर दी है।

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