नई दिल्ली : देश के कई हिस्सों और खासकर सीमावर्ती इलाकों में अवैध बांग्लादेशी घुसपैठ के कारण जनसांख्यिकी संतुलन के बिगड़ने को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नया उच्चाधिकार प्राप्त जनसांख्यिकी मिशन शुरू करने की घोषणा की है।
यह मिशन भारतीय नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा
यह मिशन घुसपैठ के कारण राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए उत्पन्न होने वाले खतरे की पहचान, राष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित करने और भारतीय नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा। इसके लिए मिशन कानूनी और प्रशासनिक रूप से जरूरी कदम उठाएगा और उनके क्रियान्वयन की मॉनिटरिंग भी करेगा।
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मिशन का गठन बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है
प्रधानमंत्री ने साफ किया कि मिशन एक निश्चित अवधि में यह काम पूरा करेगा। वैसे बिहार, असम और पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव के पहले इस मिशन का गठन बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।
दरअसल असम, पश्चिम बंगाल और बिहार के सीमावर्ती जिलों में पिछले कई दशकों से जारी घुसपैठ के कारण जनसांख्यिकी पूरी तरह से बदल गया है। अवैध बांग्लादेशी घुसपैठिए की वजह से इन जिलों में मुसलमानों की आबादी तेजी से बढ़ी है।
अभी तक इसे कानून-व्यवस्था की समस्या के रूप में देखा जाता रहा है और संवैधानिक रूप से कानून व्यवस्था राज्य का विषय होने के कारण इससे निपटने में केंद्र सरकार की भूमिका सीमित हो जाती थी।
अवैध घुसपैठ पर लालकिले से खूब बोले पीएम मोदी
पहली बार प्रधानमंत्री मोदी ने लालकिले के प्राचीर से इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा करार दिया। इसकी ठोस वजह भी है। 2020 में सीएए के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों और दिल्ली दंगे के दौरान एक वीडियो सामने आया था, जिसमें पूवरत्तर भारत को जोड़ने वाले संकरे भूभाग, जिसे चिकेन नेक भी कहा जाता है, को काटने की साजिश की बात की गई थी।
इसके अलावा पिछले साल चीन के दौरे गए बांग्लादेश के अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद युनुस ने भी चिकेन नेक की भी बात कही थी।
सूत्रों के अनुसार मोहम्मद युनुस के कार्यकाल में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आइएसआइ बड़े पैमाने पर घुसपैठ के सहारे इस संकरे भूभाग को अस्थिर करने की साजिश रची है। इस संदर्भ में प्रधानमंत्री की घोषणा को काफी अहम माना जा रहा है।
बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है अवैध घुसपैठ
बिहार में चुनाव आयोग के विशेष पुनरीक्षण अभियान (एसआइआर) के खिलाफ विपक्ष पहले ही हमलावर है। बिहार, पश्चिम बंगाल और असम में आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए यह बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।
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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पहले ही एसआइआर को मिनी एनआरसी बताते हुए पश्चिम बंगाल में नहीं होने देने का ऐलान कर चुकी हैं।
जाहिर है अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों की पहचान और उन्हें वापस भेजने के लिए उच्चाधिकार प्राप्त मिशन पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच टकराव का नया मुद्दा बन सकता है।
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