डीजीपी की नियुक्ति के लिए तय होंगे नियम,पुलिस सुधार की फाइल फिर खोलेगा सुप्रीम कोर्ट

डीजीपी की नियुक्ति के लिए तय होंगे नियम,पुलिस सुधार की फाइल फिर खोलेगा सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली :  उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को पुलिस सुधार और राज्य पुलिस प्रमुख के तौर पर कार्यवाहक नियुक्तियों से जुड़ी याचिका की सुनवाई को मंजूरी दे दी। गौरतलब है कि कोर्ट के 2006 के निर्णय के मुताबिक ऐसी नियुक्तियों पर रोक लगी हुई है।

प्रधान न्यायाधीश बीआर गवई, न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन और एनवी अंजारिया की पीठ याचिकाकर्ता पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह की याचिका पर भी विचार करेगा, जिसमें उन्होंने मांग की है कि डीजीपी के चयन के लिए एक प्रणाली बनाई जाए, जिसमें राज्य के मुख्यमंत्री, नेता विपक्ष और हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश मिलकर राज्य पुलिस प्रमुख का चयन करें।

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सर्वोच्च न्यायालय में कुछ अवमानना याचिकाएं भी दाखिल की गई हैं, जिनमें कहा गया है कि पुलिस को राजनीतिक हस्तक्षेप से दूर रखने के अदालत के 2006 के आदेश का अनुपालन नहीं हो रहा है। पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह की तरफ से वकील प्रशांत भूषण ने याचिका दायर की है। याचिका में अपील की गई है कि राज्य के डीजीपी की नियुक्ति सीबीआई निदेशक की नियुक्ति की तर्ज पर की जाए।

कोर्ट ने कहा- विधायिका कानून बनाए तो बेहतर

पीठ ने कहा कि सुधारों को लागू कराने के लिए असाधारण अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल किया जा सकता है लेकिन अंतत: विधायिका का ही हस्तक्षेप प्रभावी होगा। कोर्ट ने कहा कि अगर विधायिका कानून लाती है तो क्या प्रभावी होगा, हमारा निर्देश या कानून।

पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह ने अदालत में कहा कि निगरानी के अभाव में कोर्ट के आदेश को डीप फ्रीज कर दिया गया है। इसके चलते राज्यों ने अनुपालन को हल्का कर दिया है। वहीं, एमिकस क्यूरी राजू रामचंद्रन ने सुझाव दिया कि उच्च न्यायालयों में हर तीन महीने पर अनुपालन समीक्षा के लिए विशेष पीठ बनाने का जिम्मा दिया जाना चाहिए।

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