छत्तीसगढ़ में बड़ा नौकरी घोटाला: खबर छपते ही 9 सरकारी कर्मचारी एक साथ हुए बीमार, मेडिकल लीव लेकर फरार

छत्तीसगढ़ में बड़ा नौकरी घोटाला: खबर छपते ही 9 सरकारी कर्मचारी एक साथ हुए बीमार, मेडिकल लीव लेकर फरार

छत्तीसगढ़ में बड़ा नौकरी घोटाला: खबर छपते ही 9 ‘सरकारी’ कर्मचारी एक साथ हुए बीमार, मेडिकल लीव लेकर फरार, छत्तीसगढ़ के नवगठित जिलों में एक बड़े सरकारी नौकरी घोटाले का पर्दाफाश हुआ है, जिसमें 9 लोगों ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर न सिर्फ सरकारी नौकरी हासिल की, बल्कि 38 महीनों तक वेतन भी उठाया। मामला उजागर होते ही सभी आरोपी एक साथ ‘बीमार’ पड़ गए और मेडिकल लीव लेकर दफ्तरों से गायब हो गए हैं।

कैसे हुआ इतना बड़ा फर्जीवाड़ा?

यह पूरा खेल एक फर्जी नियुक्ति पत्र से शुरू हुआ, जिसे राजनांदगांव जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के नाम से 5 मई 2022 को जारी किया गया था। इस पत्र पर शिक्षा आयोग के सचिव और अवर सचिव के फर्जी सील और हस्ताक्षर का इस्तेमाल किया गया। इसी पत्र के आधार पर 9 लोगों को मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी और खैरागढ़ जिले के शिक्षा विभाग में डाटा एंट्री ऑपरेटर जैसे पदों पर पदस्थ कर दिया गया। इस पूरे षड्यंत्र में तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी और कार्यालय के एक क्लर्क की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है।

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खबर का असर: एक साथ ‘बीमार’ पड़े सभी जालसाज

जैसे ही यह मामला मीडिया में उजागर हुआ, एक अजीब संयोग देखने को मिला। घोटाले में शामिल सभी नौ कर्मचारी अचानक एक साथ बीमार हो गए। उन्होंने बाकायदा सरकारी प्रक्रिया के तहत मेडिकल लीव के लिए आवेदन किया, जिसे मंजूर भी कर लिया गया। इसके बाद से ये सभी अपने-अपने कार्यालयों से फरार हैं। इन्हें कलेक्ट्रेट और जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय की वित्त और डीएमएफ फंड जैसी अति-संवेदनशील शाखाओं में तैनात किया गया था।

सिस्टम पर बड़ा सवाल: 38 महीने तक लुटता रहा सरकारी खजाना

यह मामला सिर्फ फर्जी नियुक्ति का नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।छत्तीसगढ़ में बड़ा नौकरी घोटाला: खबर छपते ही 9 ‘सरकारी’ कर्मचारी एक साथ हुए बीमार

38 महीने का वेतन: इन फर्जी कर्मचारियों का वेतन पिछले 38 महीनों से अलग-अलग हाई स्कूलों में शिक्षकों के खाली पदों के विरुद्ध निकाला जा रहा था।

कोई बायोडाटा नहीं: सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि संबंधित विभाग के पास इन कर्मचारियों का कोई पुख्ता बायोडाटा, जैसे पिता का नाम या स्थायी पता, तक मौजूद नहीं है। उनकी पूरी नौकरी सिर्फ एक फर्जी नियुक्ति पत्र और सेवा पुस्तिका पर चल रही थी।
 

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धीमी जांच: मामला सामने आने के बाद भी जांच की गति बेहद धीमी है, जिससे आरोपियों को फरार होने का मौका मिल गया।

ये हैं फर्जी नियुक्ति पाने वाले आरोपी

पड़ताल में सामने आए नामों में डोलामनी मटारी, शादाब उस्मान, अमीन शेख, आशुतोष सिंह कछवाहा, रजिया अहमद, टीकम चंद, फागेंद्र कुमार सिन्हा और अजहर सिद्दीकी शामिल हैं। ये सभी कलेक्ट्रेट और शिक्षा विभाग के महत्वपूर्ण पदों पर काम कर रहे थे।










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