धान की रोपाई को लगभग एक महीना बीत चुका है, यह समय फसल की बढ़वार के लिहाज़ से बेहद अहम होता है. इस चरण पर पौधों को संतुलित खाद, समय पर सिंचाई और खरपतवार नियंत्रण की सबसे ज्यादा ज़रूरत होती है. अगर किसान सही देखभाल करें तो पौधे मज़बूत बनते हैं और आगे चलकर पैदावार भी दोगुनी हो सकती है. अगर आपकी धान की फसल में कुछ पौधे सामान्य आकार की बजाय लंबे दिखाई दे रहे हैं या छोटे रह जाते हैं तो सावधान हो जाने की जरूरत है, यह लक्षण झंडा रोग और फुट रॉट रोग के होते हैं. यह एक फंगल बीमारी है जो पूरी फसल को प्रभावित कर सकती है. ऐसे में जरूरी है कि समय रहते रोग नियंत्रण करें.
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पादप सुरक्षा रोग एक्सपर्ट डॉ. नूतन वर्मा ने बताया कि ज्यादातर यह रोग बासमती धान में दिखाई देता है, लेकिन पिछले 2 साल से मोटे धान में भी इस रोग के लक्षण दिखाई दे रहे हैं. ये धान की फसल में एक फंगल संक्रमण है,जिसमें पौधे का सामान्य से बहुत लंबा हो जाना, पत्तियों का पीला पड़ना, पतला और सुस्त दिखना, और बाद में गल कर सूख जाना. इस रोग से प्रभावित धान की बालियों में दाने नहीं पड़ते हैं और कभी-कभी पौधों की गांठों से रुई जैसी फफूंदी भी दिखाई देती है. हालांकि इस रोग से बचने के लिए किसानों को रोपाई के समय ही जरूरी उपाय करने चाहिए लेकिन अगर खड़ी फसल में इस रोग के लक्षण दिखाई दे रहे हैं तो तत्काल नियंत्रण के लिए उपाय करें.
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कैसे करें इस रोग से बचाव?
खड़ी फसल में अगर धान के पौधों का आकार सामान्य नहीं दिखाई दे रहा, तो पौधे को तने से पकड़ कर खींचे, अगर पौधा तने से टूटकर अलग हो रहा है तो समझिए कि फसल में संक्रमण फैल चुका है. जिसकी रोकथाम के लिए किसान 250 ग्राम एफिनेट मिथाइल को 125 से 130 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव कर दें या कार्बेंडाजिम (Carbendazim) और थायोफिनेट मिथाइल (Thiophanate methyl) का घोल बनाकर भी छिड़काव कर सकते हैं. यह रासायनिक उपाय करने के बाद काफी हद तक किसानों को इस रोग से राहत मिल जाएगी.
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