गणराया के आगमन से संपूर्ण माहौल बप्पामय हो गया है। ऐसे में गणेश भक्त गणपति बप्पा मोरिया का जयकारा लगा रहा है, मगर कमाल की बात है कि गंगा-जमुनी तहज़ीब की विरासत को आगे बढ़ाने वाले हमारे कई मुस्लिम कलाकार भी ऐसे हैं, जो गणेशोत्सव में बढ़चढ़ कर हिस्सा लेते हैं। ऐसे कई जाने-माने सिलेब्स से हमने जानी सांझी विरासत की बात।
लगातार तीन साल तक फ्रेंड्स के साथ मिलकर गणपति लाई हूं: अदा खान
अदा ने कहा कि मुंबई-महाराष्ट्र में पली-बढ़ी होने के कारण गणपति बप्पा से प्रेम होना स्वाभाविक है। बांद्रा में रही हूं, तो झांकियां भी खूब देखी हैं। ढोल-ताशों पर झूमे भी खूब हैं और तो और साल 2014-15-16 में लगातार तीन साल तक मैं और मेरे दोस्त मिलकर डेढ़ दिन की गणपति लाते थे। मुझे इस त्योहार का जज्बा, साज -सज्जा सबकुछ बहुत पसंद है। बीते सालों में गणपति पर दोस्तों के घर जाना एक रिचुअल-सा बन गया है। अब जैसे इस साल अपने एक्टर फ्रेंड्स अर्जुन बिजलानी, शरद मल्होत्रा, रश्मि देसाई आदि के घर जाऊंगी। इन लोगों के घर मैं हर साल जाती हूं और फरसाण के रूप में मोदक और चकली जरूर खाती हूं।
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बप्पा की भोली सूरत पर प्यार आ ही जाता है : रज़ा मुराद
रजा मुराद बोले, 'मैं खुद को खुशकिस्मत मानता हूं कि मैं एक ऐसे देश का हिस्सा हूं, सांझी विरासत बसती है। यही वजह है कि हमारे यहां सभी त्योहार धूमधाम से मनाए जाते हैं और उसमें गणेशोत्सव की तो बात ही निराली है। मुझे गणेशोत्सव की सकारात्मक वाइब्स बहुत पसंद हैं। सारा शहर जगमगा उठता है बप्पा के आगमन पर। मैं पिछले 13-14 सालों से लगातार लालबागचा राजा के दर्शन करने जाता हूं। एक अलग तरह की ऊर्जा मिलती है मुझे। बप्पा की सूरत है ही इतनी भोली है कि प्यार आ ही जाता है, तभी तो हम 'गणपति बप्पा मोरिया, पुढच्या वर्ष लवकर या' यानी अगली साल जल्दी आना का जयकारा लगाते हैं। इंडस्ट्री में भी मेरे कई दोस्त हैं, जिनके घर मैं गणपति के अवसर पर जरूर जाता हूं, जिनमें एक्टर किरण कुमार और निर्माता मार्कंड अधिकारी के घर मैं बिना नागा किए जाता हूं।'
गणेशोत्सव का मोदक खूब खाता हूं: शाहबाज़ खान
मेरे परम मित्र मुकेश रिषि हर साल मुझे गणेशोत्सव पर जरूर बुलाते हैं और उनके यहां गणेश दर्शन के लिए जाना मेरा सालों का नियम बन चुका है। मैं जब भी उनके घर जाता हूं, मोदक ले जाता हूं, वो इसलिए की गणपति का मोदक मुझे बहुत प्रिय है। मैं इसे खूब खाता हूं। इस बार मैं आशीष दीक्षित के यहां भी जाऊंगा बप्पा के दर्शन के लिए। मैं समझता हूं कि गणेशोत्सव एक पॉजिटिव एनर्जी के साथ सौहार्द होने का संदेश भी देता है। गंगा-जमुनी तहज़ीब हमारे देश की धरोहर है। मैं गणपति पर दोस्तों के यहां जाता हूं और मुझे ईद मुबारक के सबसे ज्यादा मेसेजेस मेरे नॉन-मुस्लिम फ्रेंड्स के आते हैं, तो मैं मानता हूं कि यही हमारे देश की सबसे बड़ी खूबसूरती है। हम तो कलाकार हैं। मेरा मानना है कि सबसे बड़ा धर्म इंसानियत का है और यही हमें एक-दूसरे की संस्कृतियों का सम्मान करना सिखाती है।
सोसायटी में करती हूं गणेशोत्सव का आयोजन: गुलफाम खान
मैं मुंबई के जिस माहौल में पली-बढ़ी वहां हमारे घर की दीदी गणपति पर पूरे ग्यारह घरों का दर्शन करती थी और मैं भी उनके साथ जाया करती थी। हम लोग एक मिक्स्ड कम्युनिटी में पले-बढ़े जहां हम सभी एक -दूसरे के त्योहार मिल-जुलकर मनाते आए हैं। मैं जब नौ साल की थी तब मेरी पहली पेंटिंग भी श्री गणेश और शिवजी की ही थी। कई सालों से मैं अपनी सोसायटी की कोर मेंबर हूं, तो हम अपनी सोसायटी में गणपति लाते हैं। रोचक बात ये है कि इसका स्टेज, मंदिर सजाने वाले और ढोल-ताशे बजाने वाले सभी ग़ैर हिंदू ही हैं। यही तो गणेशोत्सव की सबसे बड़ी खूबसूरती है। हमारी सोसायटी में हम गणेशोत्सव के आयोजन में कल्चरल प्रोग्राम्स भी रखते हैं। 3 दिन की गणपति में जैसे का माहौल होता है। हम लोग इकोफ्रेंडली गण्पति लाते हैं और सस्टेनेबल गणपति रखते हैं। इस मौके पर सोसायटी की रौनक देखते बनती है।
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श्वेता तिवारी, शरद केलकर और वीआईपी के यहां जाऊंगा गणपति पर: नासिर काज़ी
मैं समझता हूं कि फेस्टिवल हमें जोड़ते हैं और गणेशोत्सव मुझे भाईचारे का प्रतीक मालूम होता है। हर साल मेरे पास मेरे दोस्तों के गणेशोत्सव के अनगिनत बुलावे रहते हैं और कमाल की बात है कि मैं भी अपने सभी दोस्तों, असिस्टेंट डायरेक्टर और क्रू मेंबर्स के यहां जरूर जाता हूं। इस साल भी मैं शरद केलकर, श्वेता तिवारी, वीआईपी, श्वेता खंडूरी जैसे अपने फ्रेंड्स के यहां जाऊंगा। देखिए, मेरा तो ऐसा हिसाब है कि मैं अपने प्ले के क्रू मेंबर देसाई के यहां भी जाने वाला हूं। मुझे लगता है, यही तो मौका होता है एक-दूसरे से हिलने-मिलने का। मैं अपने रिश्तों को संजो कर रखता हूं और दुख में भी सभी का साथ देता हूं। मैं तो काजू कतली का दीवाना हूं। वैसे भी बप्पा को तो खाना-पीना बहुत पसंद है, तो हमारी भी मौज हो जाती है।
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